Category: कुंवर प्रीतम

कल सूरज की किरणों का भी बिल आएगा भाई रे

महंगाई ने कहर ढा दिया, जान बचाओ भाई रे कल सूरज की किरणों का भी, बिल आएगा भाई रे बाबू जी हैं शहर गए और मां बैठी इन्तजारी में …

संसद भी अपनी बनी फकत,हाट,मॉल बाजार है

सौगन्ध महात्मा गांधी की खाकर ये कलम उठाता हूं है साठ साल में क्या गुजरी,ये हाल सभी को सुनाता हूं जुल्मी गोरों से हुए मुकाबिल,भारत मां को आजाद किया …

क्या लायें इस बार

दीवाली तो आ गई पापा, क्या लायें इस बार बच्चा बोला देखकर, सुबह सुबह अखबार सुबह सुबह अखबार, पापा कपड़े नए दिला दो मम्मी को एक साड़ी औ बहना …

खुरचन सबके चेहरों पर, खुद से खुद सब लड़े हुए हैं

कड़वे बोल सुनाने निकला, लेकिन जग में कौन सुनेगा खुरचन सबके चेहरों पर हैं खुद से खुद सब लड़े हुए हैं ग्रन्थ, गुरु और सीख सन्त की नहीं चाहिए …

मत मांग भीख रोटी खातिर,उठ आज अभी बागी बन जा

मत मांग भीख रोटी खातिर,उठ आज अभी बागी बन जा पुरजोर बगावत दिल्ली से करनी है, चल बागी बन जा लिए कटोरा भीख मांगते,साठ साल हैं बीत गए भारत …