Category: कुमार प्रशांत

आत्म गीत

1. विमल-तनय मतिमान रूप में था जन्म यह पाया, कीर्ति-कथा सम्भावी रचने को था प्रशांत कहलाया । शैशव काल-प्रखर स्मृति मधुकथायें सजतीं, पुलकित मन-नभ में नित नव नूपुर भी …