Category: कुमार आदित्य

एक थी बिटिया,सोन की चिरैया…

एक थी बिटिया,सोन की चिरैया, घर आँगन सुना कर उड़ चली वो गुड़िया। मौसम सी कली मन था केसरिया, खुशबुओं में रंग तलाशती हर वो दूसरी गलियां। सपनो के …

शायद लौट आये वापस वो पन्नों में…..

ना जाने उस कविता का रंग क्या था, ना जाने उसका वो उमंग क्या था, दिल ढूंढ रहा है आज उसे पुराने पन्नो में, कहीं वो शब्द मेरे रूठे …

जिंदगी के किताबों पे…..

जिंदगी   के   किताब  ….   जिंदगी   के   किताबों   पे  लिखी  , कुछ  गम  के  कुछ  ख़ुशी  के  स्याही  से , पन्ने थे  मेरे  ख्वाबों  के,  कलम  मेरी  निगाहों  के. …

चुने मैंने …….

चुने  मैंने  ……. चुने,  मैंने  ख्वाबों   के  हैं  पर  चुने , सुने,  मैंने  ख्वाहिशों  के  हैं  धुन  सुने  . कुछ  ना कहा   फिर   भी   सुना ,मन  ये अक्सर  बहता  …