Category: कमलानंद सिंह ‘साहित्य सरोज’

सरस्वती स्तुति

वाहन मराल कर पुस्तक ओ वीन माल सुन्दर वसन स्वच्छ सोभे जनु चानी के। सिंह पेसवार लीन्हे शूल करवाल धारे हियख्याल प्रेम शिव वर दानी के।। भक्तन को देत …

समस्या पूर्ति 1

चुम्बक युगल बीच मानो लोह फसिगो सूखी वढ़ी लकड़ी विन पातन सरोज को आयोरी नागरी प्रचार करि दीनो है रिझावेगे वृशभानुलली को धमय सुधारो वयोन

सब लोक में उचारुंगा

सब लोक में उचारुंगा। मेरो प्रान तेरो हाथ तेरो प्रान मेरो हाथ राखि यह वीस वीसे प्रन तो निवाहूंगा।। होस में रहूँ ना चाहे होस रहूंगा हम सकल दशा …

संसार बंधन

अरे मन चंचलता तुम त्याग। भटकहु जनु तुम स्वान सदृष धरु कृष्ण भजन अनुराग।। कबहूं गृह की चिन्ता कबहूं वित्त वृ़द्धी उद्योग। कबहूं कलह करि परम मित्र सहेत दुःख …

शिव स्तुति

वरनि सकति नहिं लघुमति मेरी अद्भुत महिमा हर की। गुण विरोध सब रहत एक में शंका कछु नहिं डर की॥ नाशत है सब जगत जीव को शिव निज नाम …

लाल तुम भाजत हो क्यों आज

लाल तुम भाजत हो क्यों आज ॥ खेलि लेहु फगुआ अब मोसे तजि सब डर ओ लाज । बूझि परै गो तबही तुम को कैसो नारि समाज ॥ ब्रज …

राधाकृष्ण

कौतुक हरि राधा को हरि। ललचावत सुरवृन्द चहत वृज जन्म लेहि एक वेरि॥ बनि बनि सखा चरावे गैया लावे वन के फूल। वनमाला रचि के पहिरावे दोउ को सुख …

मानुष जन्म महा दुखदाई

मानुष जन्म महा दुखदाई । सुख नहिं पावत धनी रंक कोउ कोटिन किये उपाई । रोग सदन यह तन मल पूरे छन में जात नसाई ॥ आशा चक्र बँधे …

मान भंग

प्यारे परवीन सों पियारी ने पसारी मान, रुठि मुख फेरि बैठी आरसी की ओर है। लखि के ‘सरोज’ प्रतिबिम्ब ताकों सन्मुख में अंक भरिवे को धाय ढारे प्रेम नीर …

मलार

सखी री श्याम घटा मोहि भावे। छाय रहत नभ मे चारो दिश श्याम रूप दरसावे। चमकत बिजुरी मनो पीत पट बक पाँती वनमाल सुहावे। गरजत मनो बजावत मुरली चारु …

भरमत भूत संग

भरमत भूत संग, भंग मदमाते अंग, भसम रमाये भकुआए लसे बेस है । ग्रस्त उन्माद नहिं हरख विखाद नेकु, भूखन भुजंग मनो विगत कलेस हैं। भाव में मगन पाय …

प्रीतम जुनि जाऊ परदेश

प्रीतम जुनि जाऊ परदेश । ई हेमन्त में एकसर गेने पाएब परम कलेश ॥ शीत निवारण कारण अछि जे सुन्दर सब उपचार । से सब कतए अहाँ के भेटत …

प्यारे परवीन सों प्यारी

प्यारे परवीन सों पयारी ने पसारी मान, रूठि मुख फेरि बैठी आरसी की ओर है । लखि के ‘सरोज’ प्रतिबिम्ब ताकी सन्मुख में, अंक भरिवे को धाय ढारे प्रेम …

प्यारे आवि गयो मन मेरो

प्यारे आवि गयो मन मेरो। केसे रहिये कपटी जग मे स्वारथ पर बहुतेरो।। रहत धरम को रूप बनाये करे तीर्थ व्रत पूजा। सतयुग सों आये हैं मानो हरी चन्द्र …

धन्य हमारी माता जग में

धन्य हमारी माता जग में………धन्यo ॥ तुअ महिमा नहिं बरनि सकत कोउ सुर मुनि शेष विधाता ॥ तुमही एक इष्ट हो मेरी तेरो पद नित ध्यावों । तेरी कृपा …

जाचन कतहू न जैये प्यारे

जाचन कतहू न जैये प्यारे । हाथ पसारत कुल गुन गौरव, ता छन अपन गमैये ॥ त्यागत मित्र मित्रता प्यारी, बहु दिन जाहि निवाही । देखत ही मुख फेरि …

जागू जागू हो ब्रजराज

जागू जागू हो ब्रजराज । निशि पति मेला मलिन देखि निशि त्यागल अम्बर लाज ॥ तारागण सब छोड़ि पड़ैलिह, सखिक आचरण जानि । अपनो लोक संग त्यागै ए, अति …

गणपति स्तुति

जय जय विध्न हरन गननायक गिरजा नन्दन शुभ वरदायक सुरनर मुनि सों पुजित प्रथमहि सुभस सुभग के तुम अभिधायक। सकल कलेश विनास करन हित तेरो नाम वन्यो है सायक।। …

गंगा स्तुति

मायामोहिनी के बस भांवरी भरत ताहि मुक्ति दै के भवर बनाया निज अंग है। नीचताइ नीचन सों वेग उदवेगन सों खल चितकार धुनि कलकल संग है॥ ताइ पैन न्यायो …

कृष्ण नाम अति प्यारा हमको

कृष्ण नाम अति प्यारा हमको ॥ कटत पाप सब भाँति उचारे दिन में एकहि बार । पूजा पाठ करौं नहिं या सों वही ‘सरोज’ अधार ॥

आजु भलो बनि आयो लाल

आजु भलो बनि आयो लाल ॥ अंजन अधर पीक पलकन में, सोहत जावक सुन्दर भाल । बिनु गुन माल विराजत हिय में, अलसाने दुहु नैन विशाल ॥ मृगमद लसत …

आजु दिगम्बर के संग गौरि

आजु दिगम्बर के संग गौरि सुअवसर पेन्हि मचावती घूमे । गावति हे फगुआ अरुनारे, ‘सरोज’ से नैन भरे मतवारे ॥ त्यों करतार बजाय के नाचत, शंकर मौज में मस्त …

अन्यौक्ति

जो तरूता को फल दियो छाया करि विस्तार। करत कुठाराघात तेहि इन्धन बेचन हार।। इन्धन बेचन हार कुटिल अति नीच स्वार्थ पर। ताहि कुठाराघात करत क्यो रे पायी नर।। …