Category: खलीलुर्रहमान आज़मी

हर-हर साँस नई ख़ुशबू की इक आहट-सी पाता है

हर-हर साँस नई ख़ुशबू की इक आहट-सी पाता है इक-इक लम्हा अपने हाथ से जैसे निकला जाता है । दिन ढलने पर नस-नस में जब गर्द-सी जमने लगती है …

नश्शा-ए-मय के सिवा कितने नशे और भी हैं

नश्शा-ए-मय के सिवा कितने नशे और भी हैं कुछ बहाने मेरे जीने के लिए और भी हैं ठंडी-ठंडी सी मगर गम से है भरपूर हवा कई बादल मेरी आँखों …

दिल की रह जाए न दिल में, ये कहानी कह लो

दिल की रह जाए न दिल में, ये कहानी कह लो चाहे दो हर्फ़ लिखो, चाहे ज़बानी कह लो । मैंने मरने की दुआ माँगी, वो पूरी न हुई …

तेरी सदा का है सदियों से इन्तेज़ार मुझे

तेरी सदा का है सदियों से इंतज़ार मुझे मेरे लहू के समुन्दर जरा पुकार मुझे मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ़ के क्या देखूं उरूज-ए-फ़न मेरी दहलीज़ पर …

तुझसे बिछड़ के दिल की सदा कू-ब-कू गई

तुझसे बिछड़ के दिल की सदा कू-ब-कू गई ले आज दर्द-ए-इश्क की भी आबरू गई वो रतजगे रहे न वो नींदों के काफ़िले वो शाम-ए-मैकदा वो शब्-ए-मुश्कबू गई दुनिया …

कोई तुम जैसा था, ऐसा ही कोई चेहरा था

कोई तुम जैसा था, ऐसा ही कोई चेहरा था याद आता है कि इक ख़्वाब कहीं देखा था । रात जब देर तलक चाँद नहीं निकला था मेरी ही …