Category: किशोर कुमार दास

लम्हें खामोशी के

कितना सन्नाता छाया हुआ है अच्छा नहीं लगता न कुछ बोलती हो न कुछ बातें ही करती हो ये खामोशियाँ मुझको काँटने को दौड़ता है दूरियाँ क्या इतनी बढ़ …