Category: ख़्वाजा मीर दर्द

हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तजू करें

हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तजू करें| दिल ही नहीं रहा है जो कुछ आरजू करें| मिट जायें एक आन में कसरत नमयाँ, हम आईने के सामने …

रौँदे है नक़्शे-पा की तरह ख़ल्क़ याँ मुझे

रौंदे है नक़्शे-पा की तरह ख़ल्क याँ मुझे अय उम्र-रफ़्ता छोड़ गयी तू कहाँ मुझे अय गुल तू रख़्त बाँध उठाऊँ मैं आशियाँ गुलचीं तुझे न देख सके बाग़बाँ …

मेरा जी है जब तक तेरी जुस्तजू है

मेरा जी है जब तक तेरी जुस्तजू है ज़बाँ जब तलक है यही गुफ़्तगू है ख़ुदा जाने क्या होगा अंजाम इसका मै बेसब्र इतना हूँ वो तुन्द ख़ू है …

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया पर मुँह फिर इस तरफ़ न किया उसने जो गया फिरती है मेरी ख़ाक सबा दर-ब-दर लिए, अय चश्म-ए-अश्कबार ये क्या …

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया

दुनिया में कौन-कौन न यक बार हो गया पर मुँह फिर इस तरफ़ न किया उसने जो गया फिरती है मेरी ख़ाक सबा दर-ब-दर लिए, अय चश्म-ए-अश्कबार ये क्या …

तुहमतें चन्द अपने ज़िम्मे धर चले

तुहमतें चन्द अपने ज़िम्मे धर चले किसलिए आये थे हम क्या कर चले ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले क्या हमें …

तुम आज हंसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार बार होगी

तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी| रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर …

तुझी को जो यां जल्वा फ़र्मा न देखा

तुझी को जो यां जल्वा फ़र्मा न देखा| बराबर है दुनिया को देखा न देखा| मेरा ग़ुन्चा-ए-दिल वोह दिल-गिरिफ़ता, कि जिस को कसो ने कभी वा न देखा| अजिअत, …

चमन में सुबह ये कहती थी

चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम बहार-ए-बाग़ तो यूँ ही रही लेकिन किधर शबनम अर्क़ की बूंद उस की ज़ुल्फ़ से रुख़सार पर टपकी ताज्जुब …

क़त्ले-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

क़त्ले-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था पर तेरे अहद के आगे तो ये दस्तूर न था रात मजलिस में तेरे हुस्न के शोले के हज़ूर शम्मअ के …

कभी ख़ुश भी किया है दिल किसी रिन्दे-शराबी का

कभी ख़ुश भी किया है दिल किसी रिन्दे-शराबी का भिड़ा दे मुँह से मुँह साक़ी हमारा और गुलाबी का छिपे हरगिज़ न मिस्ल-ए-बू वो पर्दों में छिपाए से मज़ा …

अर्ज़ ओ समाँ कहाँ तेरी वुसअत को पा सके

अर्ज़ ओ समाँ कहाँ तेरी वुसअत को पा सके मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समाँ सके वेहदत में तेरी हर्फ़ दुई का न आ सके आईना …

अपने तईं तो हर घड़ी ग़म है

अपने तईं तो हर घड़ी ग़म है, अलम है, दाग़ है याद करे हमें कभी कब ये तुझे दिमाग़ है जी की ख़ुशी नहीं गिरो सब्ज़-ओ-गुल के हाथ कुछ …

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

अगर यों ही ये दिल सताता रहेगा तो इक दिन मेरा जी ही जाता रहेगा मैं जाता हूँ दिल को तेरे पास छोड़े मेरी याद तुझको दिलाता रहेगा गली …