Category: कांतिमोहन ‘सोज़’

लाल है परचम नीचे हँसिया

लाल है परचम नीचे हँसिया ऊपर सधा हथौड़ा है ! इस झंडे की शान में साथी जान भी दें तो थोड़ा है !! आधी दुनिया में उजियाली आधी में अँधियारा है …

बोल मजूरे हल्ला बोल

बोल मजूरे हल्ला बोल काँप रही सरमाएदारी खुलके रहेगी इसकी पोल बोल मजूरे हल्ला बोल! ख़ून को अपने बना पसीना तेने बाग लगाया है कुँए खोदे नहर निकाली ऊँचा …

जब आगे बढ़ते जाएँगे

(ब्रज की लोकधुन पर आधारित) अब आगे बढ़ते जाएँगे, मज़दूर-किसान हमारे मज़दूर-किसान हमारे, आशा अरमान हमारे अब आगे बढ़ते जाएँगे… हाथों की हथकड़ी छूटी, पैरों की बेड़ी टूटी मंज़िल …