Category: कनक श्रीवास्तव

रात भर सर्द हवा चलती रही

रात भर सर्द हवा चलती रही रात भर हमने अलाव जलाया मैंने मांझी से किये खुश्क सी शके काटी तुम ने भी गुजरे हुए लम्हों के पत्ते तोड़े मैंबे …