Category: कमल जोशी

तेरे परदेस में मेरा एक शहर होगा

तेरे परदेस में मेरा एक शहर होगा बादल होंगे बारिश का मौसम होगा सूरज की बंदिशों को दिखा आईना हरकदम साथ तो तेरा हमदम होगा तेरे परदेस में मेरा …

पाठशाला

किरणों का संसार है मेरी यह पाठशाला शिक्षा का रंग जहां नहीँ धर्मों कि माला गुरु भी ज्ञानी मेरे बहती ज्ञान की धारा आदर्शों का द्वार है एकता समता …

कमल की कलम भाग 7 आंसू

आंखो के रास्ते निकले जो पानी कीमत नहीँ होती उसकी कहानी तनहाइयों में होता है वो आवारा पतझड़ में घूमता मन बन बंजारा मुस्कानें भी हो जाती हैं बेमानी …

बेकसूर

हवाओं में आज एक हलचल है जाने क्यों पत्तों में सरसराहट है ये मौसम नहीँ अजीब आहट है बात कुछ नहीँ लेकिन चाहत है; फुटपाथ पर सोया मैं उठा …

तितलियां

रंग बिरंगी तितलियां उड़ रही आसमान में कितनी सुंदर प्यारी बैठी फूलों की दुकान में रंग बिरंगी तितलियां उड़ रही आसमान में। माँ ने मेरी एक बगीचा सजाया है …

नटखट चिड़िया

एक नटखट चिड़िया मेरे आंगन आती बीज बिखरे फसलों के कुछ थोड़े चुगते चुगते गीत मधुर वह गाती। एक नटखट चिड़िया मेरे आंगन आती सूरज की किरणों संग सुरों …

आरोहण

उस दिन बैठी हुई थी तुम अपने नयनों को झुकाये एकदम शांत व्याकुल मन में शून्य भाव लिये कितनी खूबसूरत थी तुम और वो पल भी मानो छुई मुई …

नया युग नई सोच

अद्भुत बात यह निराली आसमान में सजाई चंद्र ने सितारों की थाली, संध्या की चित्रकारी है या भोर की किलकारी पवन हर क्षण मनोहारी, मधुर एक आंगन बसाया भावों …

राजनीति या देशभक्ति

विभक्त करे जो देश स्वाभिमान है अपमान, बना विचित्र खेल बलिदानों का जन्मी आशंका, भुला दिया वो शहादत का किस्सा गांधी अहिंसा, बदली सोच आज बनी नमूना यादों को …

आवारापन

क्यों उम्मीदों के समन्दर में मोहब्बत के एहसास सजा रखे हैं वह कौन किनारा है जिसने दुनिया में रिश्ते बचा रखे हैं हमको मंजिल का पता कहां दूर वीरानी …

प्रेम

चंचल मन के गलियारे में प्रेम का स्मरण कराती तुम मीठी सी मुस्कान लिये कविता का सार बन आती तुम, बसंत के इस मौसम में गंगा की निर्मल धार …

बचपन

जीवन के कुरूक्षेत्र में उग आयी दूब घास बूझ न पाया मन प्रायश्चित की किसे आस असंतुष्ट हूं किससे घर या दफ्तर के किस्से आंखों में तैरता पानी सूखे …

प्रेम गणित

आओ मेरे प्रेम केन्द्र में समा जाओ हृदय में मेरे प्रेम परिधि बना जाओ चहुंओर तुम्हारा प्रेम चर्तुभुज बसा है जैसे परकार में पेन्सिल को कसा है गाल गुलाबी …

तृप्ति

तृप्ति मिलेगी हृदय को अगर तुम न समझो इसे मात्र मेरी एक कविता यदि तुम समझोगी इसे अपने हृदय में मेरे प्रेम की स्वच्छंद सरिता तो निश्चित ही तुम्हारे …

आकाश

प्रफुल्लित मन है मौसम भी चंचल है मन में विचारों का सागर लक्ष्य हिमालय सा अटल है, खुशियों की मुस्कानों का फूलों की महक का हर आंगन में सार …

वह चांद जैसी लड़की

वह चांद जैसी लड़की इस दिल पर छा रही बातें उसकी प्यारी प्यारी हर अदा उसकी निराली मुझको प्यार बतला रही आंखों में उसकी शरारतें होंठों पे छायी मुस्कुराहटें …