Category: जोश मलीहाबादी

हिटलरे-आज़म से खिताब

अस्सलामें ताजदारे जर्मनी ऐ हिटलरे आजम फिदा-ए-कौम शेदा-ए-वतन ऐ नैयरे आजम सुना तो होगा तू ने एक बदवख्तों की बस्ती है जहां जीती हुई हर चीज जीने को तरसती …

सोज़े-ग़म देके उसने ये इरशाद किया

सोज़े-ग़म देके उसने ये इरशाद किया । जा तुझे कश्मकश-ए-दहर से आज़ाद किया ।। वो करें भी तो किन अल्फ़ाज में तिरा शिकवा, जिनको तिरी निगाह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया …

शायरे आजम, शायरे जादू बयाँ

लोग कहते हैं कि मैं हूँ ‘शायरे जादू बयाँ’, ’सदर-ए- मआनी’, ‘दावर-ओ-अल्फाज़’’ , अमीरे-शायरां । और ख़ुद मेरा भी कल तक , ख़ैर से था ये ख़्याल । शायरी के …

वो जोश ख़ैरगी है तमाशा कहें जिस

वो जोश ख़ैरगी है तमाशा कहें जिसे बेपरदा यूँ हुए हैं के परदा कहें जिसे अल्लाह रे ख़ाकसारिए रिंदाँने बादाख्वार रश्क-ए-ग़ुरूर-ओ-क़ैसर-ओ-कसरा कहें जिसे बिजली गिरी वो दिल पे जिगर …

मोजिद ओ मुफक्किर कर दिया तू ने यह साबित

मोजिद ओ मुफक्किर कर दिया तू ने यह साबित, ऐ दीलावर ‘आदमी’ ज़िन्दगी क्या , मौत से लेता है टक्कर ‘आदमी’ काट सकता है रके गर्दन से खंजर आदमी …

फ़िक्र ही ठहरी तो दिल को फ़िक्र-ए- ख़ुबाँ क्यों न हो

फ़िक्र ही ठहरी तो दिल को फ़िक्रे-ख़ूबाँ क्यों न हो ख़ाक होना है तो ख़ाके-कू-ए-जानाँ क्यों न हो ज़ीस्त है जब मुस्तक़िल आवाराग़र्दी ही का नाम अक़्ल वालो! फिर …

नक़्शे-ख्याल दिल से

नक़्श-ए-ख़याल दिल से मिटाया नहीं हनोज़ बेदर्द मैंने तुझको भुलाया नहीं हनोज़ वो सर जो तेरी राहगुज़र में था सज्दा-रेज़ मैं ने किसी क़दम पे झुकाया नहीं हनोज़ महराब-ए-जाँ …

ज़िन्दगी ख़्वाबे-परीशाँ है कोई क्या जाने

ज़िन्दगी ख़्वाबे-परीशाँ है कोई क्या जाने मौत की लरज़िशे-मिज़्गाँ है कोई क्या जाने रामिश-ओ-रंग के ऐवान में लैला-ए-हयात सिर्फ़ एक रात की मेहमाँ है कोई क्या जाने गुलशने-ज़ीस्त के हर …

ख़ुद अपनी ज़िन्दगी से वहशत-सी हो गई है

ख़ुद अपनी ज़िन्दगी से वहशत-सी हो गई है तारी कुछ ऐसी दिल पे इबरत-सी हो गई है ज़ौक़े-तरब से दिल को होने लगी है वहशत कुछ ऐसी ग़म की …

ख़ामोशी का समाँ है और मैं हूँ

ख़ामोशी का समाँ है और मैं हूँ दयार-ए-ख़ुफ़्तगाँ है और मैं हूँ कभी ख़ुद को भी इंसाँ काश समझे ये सई-ए-रायगाँ है और मैं हूँ कहूँ किस से कि इस जमहूरियत …

क्या हिंद का ज़िंदा काँप रहा गूँज रही हैं तक्बीरें

क्या हिंद का जिंदाँ काँप रहा गूँज रही हैं तकबीरें उकताए हैं शायद कुछ क़ैदी और तोड़ रहे हैं जंज़ीरें दीवारों के नीचे आ-आ कर यूँ जमा हुए हैं …

क्या सिर्फ मुसलमानों के प्यारे हैं हुसैन

क्या सिर्फ मुसलमानों के प्यारे हैं हुसैन, चर्खे नौए बशर के तारे हैं हुसैन, इंसान को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे है हुसैन

किसने वादा किया है आने का

किसने वादा किया है आने का हुस्न देखो ग़रीबख़ाने का रूह को आईना दिखाते हैं दर-ओ-दीवार मुस्कुराते हैं आज घर, घर बना है पहली बार दिल में है ख़ुश …

किस को आती है मसिहाई किसे आवाज़ दूँ

किस को आती है मसिहाई किसे आवाज़ दूँ बोल ऐ ख़ूं ख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूँ चुप रहूँ तो हर नफ़स डसता है नागन की तरह आह भरने में …

क़सम है आपके हर रोज़ रूठ जाने की

क़सम है आपके हर रोज़ रूठ जाने की के अब हवस है अजल को गले लगाने की वहाँ से है मेरी हिम्मत की इब्तिदा अल्लाह जो इंतिहा है तेरे …

क़दम इंसान का राहे-दहर में

क़दम इंसान का राह-ए-दहर में थर्रा ही जाता है चले कितना ही कोई बच के ठोकर खा ही जाता है नज़र हो ख़्वाह कितनी ही हक़ाइक़-आश्ना फिर भी हुजूम-ए-कशमकश में आदमी घबरा …

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-शबिस्तां अलविदा अलविदा ऐ जलवागाहे हुस्न-ए-जानां अलविदा तेरे घर से एक ज़िन्दा लाश उठ जाने को है …

इबादत करते हैं जो लोग जन्नत की तमन्ना में

इबादत करते हैं जो लोग जन्नत की तमन्ना में इबादत तो नहीं है इक तरह की वो तिजारत है जो डर के नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुदा का नाम लेते हैं इबादत क्या …

अहल-ए-दवल में धूम थी रोज़-ए-सईद की

अहल-ए-दवल में धूम थी रोज़-ए-सईद की मुफ़्लिस के दिल में थी न किरन भी उम्मीद की इतने में और चरख़ ने मट्टी पलीद की बच्चे ने मुस्कुरा के ख़बर …

अशवों को चैन ही नहीं आफ़त किये बगैर

अशवों को चैन नहीं आफ़त किये बगैर तुम, और मान जाओ शरारत किये बगैर! अहल-ए-नज़र को यार दिखाना राह-ए-वफ़ा ऐ काश! ज़िक्र-ए-दोज़ख-ओ-जन्नत किये बगैर अब देख उस का हाल …