Category: जगन्नाथप्रसाद ‘मिलिंद’

उगता राष्ट्र

मेरे किशोर, मेरे कुमार!  अग्निस्फुलिंग, विद्युत् के कण, तुम तेज पुंज, तुम निर्विषाद, तुम ज्वालागिरि के प्रखर स्रोत, तुम चकाचौंध, तुम वज्रनाद, तुम मदन-दहन दुर्धर्ष रुद्र के वह्निमान दृग …