Category: जगमोहन श्रीवास्तव

जब एक ‘टेलर’ बना पार्षद

(1 ) आधी ‘उम्र’ चीथड़ों को गूंथने में काड़ दी, आधी में ‘वरिष्ठ पार्षदी’ हाथ आई है। छोड़ि देगों लोक-लाज अवना करों लिहाज़, ‘भेड़िया’ के घर आज खुद भेड़ …

भारत देखो लुटगईं-भारत की नारियाँ

(१) अपने ही घर में मिटगईं , सिंदूर लालियाँ ! भारत देखो लुटगईं, भारत की नारियाँ !! बेटा मरा आगे पड़ा, माँ ता न रो सकी ! अंतिम समय …

पहचानो-कौन है ?

(1) छोटा सा कद लागे,गोल-मटोल सो, गोल से गाल,लिये हैं ललामी ! स्वेत हैं केस,रहें विखरे, मुख मूछ-मुड़ी,पहने कुरता पजामी !! (2) चारा जि खाए,पचाए गयो, अव रेल में …

निश्चित दूरी से देखो तो

निश्चित दूरी से देखो तो, ए सुन्दर संसार लगे….! (१) दूर न जाना पास आना,तव रिस्तों में प्यार बड़े I निश्चित दूरी से देखो तो, ए सुन्दर संसार लगे …