Category: जगदीश तपिश

लड़खड़ाते हुए तुमने जिसे देखा होगा

लड़खड़ाते हुए तुमने जिसे देखा होगा वो किसी शाख़ से टूटा हुआ पत्ता होगा अजनबी शहर मैं सब कुछ ख़ुशी से हार चले कल इसी बात पे घर-घर मेरा …

रूठी हुई बहार सी लगती है ज़िन्दगी

रूठी हुई बहार-सी लगती है ज़िन्दगी टूटी हुई पतवार-सी लगती है ज़िन्दगी ना रोशनी है और ना जलता हुआ चराग उजड़ी हुई मजार-सी लगती है ज़िन्दगी मंजिल ना कारवाँ …

महसूस हो रही थी शर्मिंदगी मुझे

महसूस हो रही थी शर्मिंदगी मुझे रोते हुए मिली थी मेरी ज़िन्दगी मुझे तौबा तो कर चुके थे छुएंगे न जाम को फिर मैकदे में लाई तेरी दोस्ती मुझे …

बंद कमरे में जो मिली होगी

बंद कमरे में जो मिली होगी वो परेशान ज़िन्दगी होगी यूँ भी कतरा के गुज़रने की वज़ह हम में तुम में कहीं कमी होगी हम सितम को वहम समझ …

मंदिर से मस्ज़िदों से मैं दूर भागता हूँ

मंदिर से मस्ज़िदों से में दूर भागता हूँ दिल मोम-सा है लेकिन पत्थर तराशता हूँ रहबर नहीं हूँ लेकिन रहजन भी मैं नहीं हूँ मेरे साथ चल के देखो …

बेच दूंगा मैं ख़ुद को खरीदेंगे आप

बेच दूंगा मैं ख़ुद को ख़रीदेंगे आप सोच के आज आया हूँ बाज़ार मैं दोस्तो मेरी कीमत जियादह नहीं मैं भी बिक जाऊंगा आपके प्यार मैं पहले हर बोल …

ज़िन्दगी तल्ख़ सही फिर भी बहुत प्यार किया

ज़िन्दगी तल्ख़ सही फिर भी बहुत प्यार किया मौत भी आई न वादे पे इंतज़ार किया अपनी परछाई पे उनसे यकीं किया न गया हमने गैरों की मसीहाई पे …

कुछ तो हूँ और कुछ नहीं हूँ मैं

कुछ तो हूँ और कुछ नहीं हूँ मैं चंद लम्हों की रुत नहीं हूँ मैं मुझको सज़दा करो न पूजो तुम संगमरमर का बुत नहीं हूँ मैं मेरे नीचे …

उनके बगैर यूँ ही जी के भी क्या करें

उनके बगैर यूँ ही जी के भी क्या करें रहने दो चाक दामाँ सी के भी क्या करें मेरे साकिया सुना है तेरा जाम ज़िन्दगी है जब टूट ही …

उठा के हाथ लेता हूँ बढ़ा के हाथ देता हूँ

उठा के हाथ लेता हूँ बढ़ा के हाथ देता हूँ वो देने वाला देता है मैं ले के बाँट देता हूँ बहुत दुश्वार राहे इश्क पे चलना है ऐ …

इक तेरे राज़ को दुनिया से छुपाने के लिए

इक तेरे राज़ को दुनिया से छुपाने के लिए बातें क्या-क्या न तलाशी हैं बहाने के लिए मेरी अख़लाक़ मंदियों का ज़र्फ़ तो देखो ज़िन्दगी कम पड़ी ग़ैरों पे …