Category: जे० स्वामीनाथन

सेव और सुग्गा

मैं कहता हूँ महाराज इस डिंगली में आग लगा दो पेड़ जल जाएँगे तो कहाँ बनाएँगे घोंसले ये सुग्गे देखो न, इकट्ठा हमला करते हैं एक मिनट बैठे, एक …

जलता दयार

झींगुर टर्राने लगे हैं और खड्ड में दादुर अभी हुआ-हुआ के शोर से इस चुप्पी को छितरा देंगे सियार ज़रा जल्दी चलें महाराज यह जंगल का टुकड़ा पार हो …

गाँव का झल्ला

हम मानुस की कोई जात नहीं महाराज जैसे कौवा कौवा होता है, सुग्गा, सुग्गा और ये छितरी पूँछ वाले अबाबील, अबाबील तीर की तरह ढाक से घाटी में उतरता …