Category: इंदर भोले नाथ

ज़ारी रहा मेरा…

मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा, हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा… मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस होता है उम्मीद-ए-कारवाँ पे लेकिन नज़र …

IBN…

युं ही बिकते रहें जमाने मे, कभी महफिल,कभी मयखाने में… पैमाने छलकते रहें,यादों को मिटाने मे, खो दियें खुद को ही “ऐ-जिन्दगी” तुझे भुलाने में… …इंदर भोले नाथ

अधुरी क्यूं है…

तुं पास होकर भी, ये दुरी क्यूं है हमें तन्हा छोड़ जाना जरूरी क्यूं है, कभी तो हमसे मील मुकम्मल होकर “ऐ-जिन्दगी” तुं मीलती अधुरी क्यूं है… ….इंदर भोले …

यादों के पन्ने से…..

हर शाम…. नई सुबह का इंतेजार हर सुबह…. वो ममता का दुलार ना ख्वाहिश,ना आरज़ू ना किसी आस पे ज़िंदगी गुजरती थी… हर बात…. पे वो जिद्द अपनी मिलने …

ये गुनाह करते हैं…

कभी खामोश तो कभी बयां करते हैं, बे-वजह दिल को युं परेशां करते हैं, जन्नत-ए-इश्क के मुकाम ने हमें तबाह कर दिया फिर भी न जाने क्युं ये गुनाह …