Category: हिमांशु ‘मोहन’

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

father’s Day पर विशेष…

मेरे पिता एक मिसाल हैं मेरी कामयाबी की…. मेरे पिता एक ज़ज्बा है मेरे कुछ कर गुजरने का…. हाँ मैंने उनसे ही सीखा है गम में भी मुस्कुराना और …

इक और जनम लेना होगा

तुम्हें जीवन संगीत बनाने को एक और जनम लेना होगा मैं गीत तुम्हारे लिखता हूं तुमको शायद ये पता न हो सब गीत तुम्हें सुनाने को एक और जनम …