Category: हरिहर झा

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

प्रकृति मौसी

माँ सी मौसी आगबबूला जाने कब से, अंगारों में लड़खड़ा गई आवारा बच्चे  ना माने पकड़ें गरदन करें शरारत  उसको काटें लहू भरे गालों  पर चाटें बही वेदना की …