Category: हरि पौडेल

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

होली

होली मना रहे हैं आज होली। रंगाते हुए धोती और चोली। रिस-राग त्याग कर देखो, भूल कर सब तीता बोली। होली है भाई होली है कहते, खाते पीते भंग …

गजल

गजल बड़ी मुश्किलों से सहारा लगा था डुब्नेवाला कश्ती किनारा लगा था जाने किधर से आई बड़ी तूफान जहाँ खड़ा कारवाँ बंजारा लगा था फिर बर्षात ले आई बाढ़ …

मेरा घमण्ड

राजाबलि पताल पहुंचे घमण्ड के कारण, गंगा खो गयीं घमण्ड से शिव के जटा मे, राख हो गयी सोने की लंका घमण्ड के ही चलते, तार्किक शास्त्री बन्दी का …

गजल

क्या करू सिकवा खुदा से वह भी तेरा चाहनेवाला निकला फूल सी कोमल बदन में पत्थर दिल बनानेवाला निकला प्यार की क्या मिसाल दें हम दो बदन और एक …

गजल

गैरों की क्या बात करूँ हमने अपनो को भी आजमाया था पूजा किया उन पत्थरों को जिससे रास्ते में चोट खाया था कंधे में लेकर घूमते थे जिसे आज …

गजल

गजल बेजान बनाकर चल दिए जो मेरी ही जान थी कैसे कहूँ उसे बेवफ़ा जो मेरी ही ईमान थी जिस्म था वो मेरी मै तो बस एक छावँ था …

भीख

दानी देता है कहूँ या खुदा ही देता है तकदीर हमें तो हरदम दगा ही देता है हाथ फैलाऊँ तेरे या भक्तों के सामने वक्त बेवक्त तूँ हमें सजा …

गजल

दोस्ती नहीं सही दुश्मनी बनाए रखना तेरा मेरा जहाँ पे चर्चा चलाए रखना ये जान तो तेरी थी न हुवा तुझे मंजूर हम न सही मेरी यादें सिने में …

गजल

गजल तुम से मिल कर इश्क मेरा फिर बेचारा न हो जाए। आँखों से बहते पानि कहीं किनारा न हो जाए। मिलने के वाद हि तो ये दर्द बना …

गजल

दोस्ती नहीं सही दुश्मनी बनाए रखना तेरा मेरा जहाँ पे चर्चा चलाए रखना ये जान तो तेरी थी न हुवा तुझे मंजूर हम न सही मेरी यादें सिने में …

भीख

दानी देता है कहूँ या खुदा ही देता है तकदीर हमें तो हरदम दगा ही देता है हाथ फैलाऊँ तेरे या भक्तों के सामने वक्त बेवक्त तूँ हमें सजा …

बहार के साथ

बहार के साथ उनका जवाब आया सवाल के साथ नहीं बनना अनारकली मिसाल के साथ दोहराएंगे इतिहास फिर वे अहम में चुन देंगे कनिजको दिवार के साथ मोहब्बत का …

मुक्तक

पलक झपकते ही मौषम बदल जाए वहीँ मुस्कराहट है ऐसी फूल खिल जाए वहीँ मधु जैसी बोली उनकी हिरणी जैसी चाल है तिर्छी नजर कुछ ऐसी है पत्थर पिघलजाए …

गजल

चाँद से होती थी रोज मुलाक़ात वक्त की बात है आज हो गई अमावस की रात वक्त की बात है न आह निकाली मुह से चोट खाते रहे उनसे …

गजल

मिलन की वह पहली रात का क्या कहना अजनवियों की मुलाक़ात का क्या कहना तब एक पलंग पर दो अनजान मिले जब घूंघट उठते हीं बनि जज्बात का क्या …

गजल

कीतने बहाए आँशु पर जज्बात को धोया न गया हिचकियाँ रुक गई मगर आँखों से सोया न गया फूल की तरह सम्हाला जिसे बोने लगे काँटे वही सहते रहे …

आजाद इन्डिया

कहते है आजाद है इन्डिया और तिरंगा लहराते है बोलते साहब अंग्रेजी में और हिंदी में शर्माते है सत्तू खाना छोड़ के सबेरे सेन्डविच चबाते है ताजा रोटी पड़ी …

हुस्न

हुस्न की वह हूर थी जो कहर ढाह कर चली गयीं दिल की बातें कहते उनको पर मुस्कुराकर चली गयीं सहमी सहमी आँखे उनकी पलकें हिलती पत्तों जैसे आई …

धर्म ग्रन्थ

गीता मे भरा हुवा ज्ञान देखा बाइबल मे जिशश महान देखा ह्त्या कर रहे हैं अल्लाह के नाम पर हिन्सा रहित कुरान देखा भोग-विलास सब त्यागने वाले शिद्धार्थ बुध्द …