Category: हरदीप कौर सन्धु

चुप लहरें ( सेदोका)

डॉ हरदीप कौर सन्धु 1 टिमटिमाते  तारों -भरा अम्बर  जोड़कर खाट को  छत पे सोएँ  ठण्डी -ठण्डी हवाएँ  ज्यों लोरियाँ सुनाएँ  2 गाँव की गली  हाँक  दे बनजारा   …