Category: हरदीप कौर सन्धु

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

चुप लहरें ( सेदोका)

डॉ हरदीप कौर सन्धु 1 टिमटिमाते  तारों -भरा अम्बर  जोड़कर खाट को  छत पे सोएँ  ठण्डी -ठण्डी हवाएँ  ज्यों लोरियाँ सुनाएँ  2 गाँव की गली  हाँक  दे बनजारा   …