Category: गुरुभक्तसिंह ‘भक्त’

नूरजहाँ

सुरभित पुष्पों की रज औ, लेकर मोती का पानी। हिम बालाओं के कर से, जो गई प्रेम से सानी॥ पृथिवी की चाक चलाकर, दिनकर ने मूर्ति बनाई। छवि फिर …