Category: गुरप्रीत सिँह

जिन्द्गी

जिँदगी हँसती, मुस्कुराती मंद पवन सी गुनगुनाती अच्छी लगती है जिंदगी। दुखोँ से भरी, गहरी खाई सी अनिश्चिँताओँ से उलझी हुई चुनौती है जिँदगी। धूप-छांव सी, पक्ष-प्रतिपक्ष सी, बादल …

प्यारी बहना

प्यारी बहना मेरी प्यारी नन्हीँ बहना है वो सारे घर का गहना। सुंदर मुखङा, गोल-मटोल चंचल आँखे लगती प्यारी, ना वो रुकती, ना वो थकती बातेँ करती ढेर सारी।। …

दीवारेँ

निरंतर उठती बनती, बढती दीवारेँ देती हैँ सुरक्षा प्राकृतिक-अप्राकृतिक विपत्ति से तब अच्छी लगती हैँ दीवारेँ। धीरे-धीरे ह्रदय मेँ पनपती ईर्ष्या, द्वेष की दीवारेँ बाँटती मानवता को धर्म, जाति …