Category: गुरचरन मेह्ता

कैसे दिल मिला करते हैं

जानता था के कभी कभी दुश्मन भी गले मिला करते हैं पहली बार जाना के चट्टानों में भी फूल खिला करते हैं हंसना हंसाना, मिलना मिलाना मेरी फितरत में …

जब कण चावल के पकवान बने***

चले सुदामा कृष्ण से मिलने घबराये घबराये पत्नी ने जो दी थी भेंट, अंदर वे उसे छिपाये पहचानेंगे बाल सखा मन थी दुविधा भारी पहुँच गए वे द्वारका नगरी …

कुछ अलग-अलग विषय पर शेरो-शायरी हो जाए…

हिम्मत कर आज तो पार कर ही लूँगा मैं इस बल खाती नदी को आखिर कब तक करता रहूँ इंतज़ार लहरों के शान्त होने का ____________________________________ दिल-विल,प्यार-व्यार, बातें सुन …

क्या क्या देखा

बचपन देखा जाता मैंने जाती जवानी देखी I बुढ़ापा आये, जाए न जीवन की कहनी देखी I अंतकाल हो मस्तिष्क, काम नहीं फिर करता, विनाश काले विपरीत बुद्धि बाते …

अक्सर डर जाता हूँ मै अपने ही साये से..

अक्सर डर जाता हूँ मै अपने ही साये से.. हम दोनों साथ साथ रहते हैं एक अलग अलग फर्क के साथ बताता रहता है अक्सर मुझे मेरी ही बातें …

टूट कर मैं बिखरता नहीं

अंजाम की परवाह नहीं और आगाज़ से मैं डरता नहीं इमानदारी के कुछ नज़दीक हूँ बेईमानी मैं करता नहीं नश्तर सी चुभ जाती थी बात उनकी गहराई तक नासूर …