Category: गुलज़ार

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन ऐसी तस्वीर के टुकड़े …

हिंदुस्तान में दो दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं

हिंदुस्तान में दो दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं एक है जिसका सर नवें बादल में है दूसरा जिसका सर अभी दलदल में है एक है जो सतरंगी थाम के …

हमें पेड़ों की पोशाकों से इतनी-सी ख़बर तो मिल ही जाती है

हमें पेड़ों की पोशाकों से इतनी सी ख़बर तो मिल ही जाती है बदलने वाला है मौसम… नये आवेज़े कानों में लटकते देख कर कोयल ख़बर देती है बारी …

सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर

सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ पर चमकती चिंगारियाँ-सी चकरा रहीं आँखों की पुतलियों में नज़र पे चिपके हुए हैं कुछ चिकने-चिकने से रोशनी के धब्बे जो पलकें …

वो जो शायर था चुप सा रहता था

वो जो शायर था चुप-सा रहता था बहकी-बहकी-सी बातें करता था आँखें कानों पे रख के सुनता था गूँगी खामोशियों की आवाज़ें! जमा करता था चाँद के साए और …

वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा

वक़्त को आते न जाते न गुजरते देखा न उतरते हुए देखा कभी इलहाम की सूरत जमा होते हुए एक जगह मगर देखा है शायद आया था वो ख़्वाब …

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ इक पल के कुछ दो पल के कुछ परों से हल्के होते हैं बरसों के तले चलते-चलते भारी-भरकम हो जाते हैं कुछ भारी-भरकम …

लैंडस्केप-1

दूर सुनसान-से साहिल के क़रीब एक जवाँ पेड़ के पास उम्र के दर्द लिए वक़्त मटियाला दोशाला ओढ़े बूढ़ा-सा पाम का इक पेड़, खड़ा है कब से सैकड़ों सालों …

रात भर सर्द हवा चलती रही

रात भर सर्द हवा चलती रही रात भर हमने अलाव तापा मैंने माजी से कई खुश्क सी शाखें काटीं तुमने भी गुजरे हुये लम्हों के पत्ते तोड़े मैंने जेबों …

मैं अपने घर में ही अजनबी हो गया हूँ आ कर

मैं अपने घर में ही अजनबी हो गया हूँ आ कर मुझे यहाँ देखकर मेरी रूह डर गई है सहम के सब आरज़ुएँ कोनों में जा छुपी हैं लवें …

मेरे रौशनदान में बैठा एक कबूतर

मेरे रौशनदार में बैठा एक कबूतर जब अपनी मादा से गुटरगूँ कहता है लगता है मेरे बारे में, उसने कोई बात कही। शायद मेरा यूँ कमरे में आना और …