Category: गुलाब सिंह

कितने दिन हुए देखे

फूल पर बैठा हुआ भँवरा शाख पर गाती हुई चिड़िया घास पर बैठी हुई तितली और तितली देखती गुड़िया हमें कितने दिन हुए देखे ! घाट के नीचे झुके दो …

गीतों का होना

गीत न होंगे क्या गाओगे ? हँस-हँस रोते रो-रो गाते आँसू-हँसी राग-ध्वनि-रंजित हर पल को संगीत बनाते लय-विहीन हो गए अगर तो कैसे फिर सम पर आओगे । तन में …

हतप्रभ हैं शब्द

शायद किसी मोड़ पर ठहर जाए थककर हाँफती ज़िन्दगी लौट आए । पीपल के पत्तों तक का हिलना बन्द है इस कदर मौसम निस्पन्द है हवाओं के झोंके सिर्फ …