Category: गोकुल चन्द्र उपाध्याय

सपना (कल्पना या हकीकत)

माँ के आँचल में लिपटे देखा मैंने एक सपना चारों ओर खुशियां ही खुशियां लगता कभी ऐसा था जग अपना स्वार्थ और ईर्ष्या रहित सच्चाई और प्रेम सहित न …

समुद्री लहरें

समुद्र की लहरों से अनसुनी आवाज निकलती कहना भी चाहें लहरें कुछ जुबां इनमें कहाँ होती मैंने समझी मैंने जानी इन लहरों की आवाज समुद्र से निकलकर अस्तित्व ढ़ूँढ़ती …

जग वेदना – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

स्वर मेरे कंपित होते जब ह्रदय स्थिर हो जाता तब देख चेतना इस जग की मन विचलित हो जाता है जागृति का है आभाव अँधापन सा छाया है देख …

जागृति का उदय – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ लाचारी से नाता जोड़ कब तक तू बच पाएगा भारत माँ की मिट्टी में तू धूल -२ हो जाएगा सूख गए वो पेड़ सारे …

एक – दूजे से तार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

चाँद भी हो जाये काला जो सूरज से न हो उजियाला जड़े भी वे है सूखी धरती से जो ऊपर उठी पानी भी है वो मटमैला जो कंकड़ – …

सूखा पेड़ – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

दूर खेत किनारे एक सूखा पेड़ खड़ा बंजर भूमि जैसा ही बंजर वो पेड़ पड़ा जिसकी छाव में बच्चे खेलते थे कभी टहनियों में उसकी झूलते थे कभी जो …

अमर शहीद – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

मिट गया जो वतन की माटी पर वीर वो याद किया जाएगा जन्मा था वो जिस माटी पर कर्ज़ उतारे बिन ना जायेगा हिंदुस्तान उसका एक शब्द था ना …

इंतजार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

यूँ तन्हा अकेले जिए जा रहा हूँ है इंतजार…………. है इंतजार जज्बातों को अपने सिमेटे जा रहा हूँ है इंतजार…………. है इंतजार जबसे है देखा तुझे थम सा गया …

इज़हार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

ना जाने कब होगा इज़हार मेरी मोहब्बत का, ना जाने कब होंगे बयां लव्ज़ मेरे । चाहता हूँ तुझे इस कदर, कह भी न पाया, कह भी ना पाऊं …

झूठे वादे – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

ना करने थे वो वादे, ना देनी थी ये यादें। जिनसे जुडी है तेरी-मेरी मुलाकातें। जाने क्यों मुझको छोड़ गया तू, जैसे गगन को टूटता तारा । भूल ना …

पश्चाताप – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

उर में उठता एक तूफान सुर मेरे थे तब नादान प्रेमाभास से हो अनजान अनभिज्ञ रहा तेरा पैगाम पश्चाताप की ये ज्वाला खिंचती मुझको मधुशाला आँखों में अँधियारा छाया …