Category: गोरखनाथ

वदन्त गोरष राई परसि ले केदारं

वदन्त गोरष राई परसि ले केदारं पांणी पीओ पूता त्रभुवन सारं । ऊँचे-ऊँचे परवत विषम के घाट तिहाँ गोरषनाथ कै लिया सेबाट । काली गंगा, धौली गंगा झिलमिल दीसै …

रूपे-रूपे कुरूपे गुरुदेव, बाघनी भोले-भोले

रूपे-रूपे कुरूपे गुरुदेव, बाघनी भोले-भोले । जिन जननी संसार दिषाया, ताको ले सूते षोले । गुरु षोजो गुरुदेव, गुरु षोजो ब्द्न्त गोरख ऐसा । मुषते होई तुम्हें बंधनि पड़िया …

रमि रमिता सों गहि चौगानं

रमि रमिता सों गहि चौगानं, काहे भूलत हो अभिमानं । धरन गगन बिच नहीं अंतरा, केवल मुक्ति भैदानं । अंतरि एक सो परचा हूवा, तब अनंत एक में समाया …

मारो मारो स्र्पनी निरमल जल पैठी

मारो मारो स्र्पनी निरमल जल पैठी । त्रिभुवन डसती गोरषनाथ दीठी ।। मारो स्र्पनी जगाईल्यो भौरा, जिनि मारी स्र्पनी ताको कहा करे जोंरा । स्र्पनी कहे मैं अबला बलिया, …

बूझो पंडित ब्रह्म गियानम

बूझो पंडित ब्रह्म गियानम गोरष बोलै जाण सुजानम । बीज बिन निसपती मूल बिन विरषा पान फूल बिन फलिया, बाँझ केरा बालूड़ा प्यंगुला तरवरि चढ़िया । गगन बिन चन्द्र्म …

पद

रहता हमारै गुरु बोलेये, हम रहता का चेला । मन मानै तौ संगि फिरै, निंहतर फिरै अकेला ।। अवधू ऐसा ग्यांन बिचारी तामैं झिलिमिलि जोति उजाली । जहाँ जोग …

गोरख बाणी

नाथ बोले अमृत बाणी वरिषेगी कंबली भीजैगा पाणी । गाडी पडरवा बांधिले शूंटा, चले दमामा बाजिलै ऊंटा । कऊवा की डाली पीपल बासे, मूसा कै सबद बिलइया नासे । …

कैसे बोलों पंडिता देव कौने ठाईं

कैसे बोलों पंडिता देव कौने ठाईं निज तत निहारतां अम्हें तुम्हें नाहीं । (टेक ) पषाणची देवली पषाणचा देव, पषाण पूजिला कैसे फीटीला सनेह । सरजीव तैडिला निरजीव पूजिला, …

कुम्हरा के घर हांडी आछे अहीरा के घरि सांडी

कुम्हरा के घर हांडी आछे अहीरा के घरि सांडी । बह्मना के घरि रान्डी आछे रान्डी सांडी हांडी । राजा के घर सेल आछे जंगल मंधे बेल । तेली …

कहणि सुहैली रहणि दुहैली

कहणि सुहैली रहणि दुहैली कहणि रहणि बिन थोथी । पठ्या गुण्या सूवा बिलाई षाया पंडित के हाथ रह गई पोथी । कहणि सुहैली रहणि दुहैली बिन षाया गुड मीठा …

आफू खाय भांग मसकावे

आफू खाय भांग मसकावे ता मैं अकलि कहाँ तै आवे । चढ़ताँ पित्त उतरताँ बाई, ताते गोरख भाँगि न षाई ।। मिंदर छाडे कुटी बँधावै, त्यागे माया और मँगावै …

अवधू गागर कंधे पांणीहारी, गवरी कन्धे नवरा

अवधू गागर कंधे पांणीहारी, गवरी कन्धे नवरा । घर का गुसाई कोतिग चाहे काहे न बन्धो जोरा । लूंण कहै अलूणा बाबू घृत कहै मैं रूषा । अनल कहै …