Category: गोपाल सिंह नेपाली

हिमालय ने पुकारा

शंकर की पुरी चीन ने सेना को उतारा चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा हो जाए पराधीन नहीं गंगा की धारा गंगा के किनारों को शिवालय ने पुकारा हम …

स्‍वतंत्रता का दीपक

घोर अंधकार हो, चल रही बयार हो, आज द्वार द्वार पर यह दिया बुझे नहीं। यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है । शक्ति का दिया हुआ, शक्ति …

सरिता

यह लघु सरिता का बहता जल कितना शीतल¸ कितना निर्मल¸ हिमगिरि के हिम से निकल–निकल¸ यह विमल दूध–सा हिम का जल¸ कर–कर निनाद कल–कल¸ छल–छल बहता आता नीचे पल …

शासन चलता तलवार से

शासन चलता तलवार से ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से । चरखा चलता है हाथों से, शासन चलता तरवार से ।। यह राम-कृष्ण की जन्मभूमि, पावन …

वसंत गीत

ओ मृगनैनी, ओ पिक बैनी, तेरे सामने बाँसुरिया झूठी है! रग-रग में इतना रंग भरा, कि रंगीन चुनरिया झूठी है! मुख भी तेरा इतना गोरा, बिना चाँद का है …

यह लघु सरिता का बहता जल

यह लघु सरिता का बहता जल कितना शीतल, कितना निर्मल हिमगिरि के हिम से निकल निकल, यह निर्मल दूध सा हिम का जल, कर-कर निनाद कल-कल छल-छल, तन का …

मैं प्यासा भृंग जनम भर का

मैं प्यासा भृंग जनम भर का फिर मेरी प्यास बुझाए क्या, दुनिया का प्यार रसम भर का । मैं प्यासा भृंग जनम भर का ।। चंदा का प्यार चकोरों …

मेरी दुल्‍हन सी रातों को .

बदनाम रहे बटमार मगर, घर तो रखवालों ने लूटा मेरी दुल्‍हन सी रातों को, नौलाख सितारों ने लूटा दो दिन के रैन-बसेरे में, हर चीज़ चुरायी जाती है दीपक …

मेरा धन है स्वाधीन क़लम

राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम मेरा धन है स्वाधीन क़लम जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी उधार दिवा को दी पतवार थमा दी लहरों को …

मुसकुराती रही कामना

तुम जलाकर दिये, मुँह छुपाते रहे, जगमगाती रही कल्पना रात जाती रही, भोर आती रही, मुसकुराती रही कामना चाँद घूँघट घटा का उठाता रहा द्वार घर का पवन खटखटाता …

बाबुल तुम बगिया के तरुवर

बाबुल तुम बगिया के तरुवर, हम तरुवर की चिड़ियाँ रे दाना चुगते उड़ जाएँ हम, पिया मिलन की घड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें, ज्यों मोती की …

बरस-बरस पर आती होली

बरस-बरस पर आती होली, रंगों का त्यौहार अनूठा चुनरी इधर, उधर पिचकारी, गाल-भाल पर कुमकुम फूटा लाल-लाल बन जाते काले, गोरी सूरत पीली-नीली, मेरा देश बड़ा गर्वीला, रीति-रसम-ऋतु रंग-रगीली, …

बदनाम रहे बटमार

बदनाम रहे बटमार मगर, घर तो रखवालों ने लूटा मेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा दो दिन के रैन बसेरे की, हर चीज़ चुराई जाती है …

प्रार्थना बनी रही

रोटियाँ ग़रीब की प्रार्थना बनी रही एक ही तो प्रश्न है रोटियों की पीर का पर उसे भी आसरा आँसुओं के नीर का राज है ग़रीब का ताज दानवीर …

नवीन कल्पना करो

निज राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो, तुम कल्पना करो। अब देश है स्वतंत्र, मेदिनी स्वतंत्र है मधुमास है स्वतंत्र, चांदनी स्वतंत्र …

दो प्राण मिले

दो मेघ मिले बोले-डोले, बरसाकर दो-दो बूँद चले । भौंरों को देख उड़े भौरें, कलियों को देख हँसी कलियाँ, कुंजों को देख निकुंज हिले, गलियों को देख बसी गलियाँ, …

दूर जाकर न कोई बिसारा करे

दूर जाकर न कोई बिसारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे, यूँ बिछड़ कर न रतियाँ गुज़ारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे । मन मिला तो जवानी रसम तोड़ दे, …

दीपक जलता रहा रातभर

तन का दिया, प्राण की बाती, दीपक जलता रहा रात-भर । दु:ख की घनी बनी अँधियारी, सुख के टिमटिम दूर सितारे, उठती रही पीर की बदली, मन के पंछी …

तू पढ़ती है मेरी पुस्तक

तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ तू चलती है पन्ने-पन्ने, मैं लोचन-लोचन बढ़ता हूँ मै खुली क़लम का जादूगर, तू बंद क़िताब कहानी की मैं …