Category: गिर्राज किशोर शर्मा ‘गगन’

जिंदगी।

जिंदगी। ……………. रोते रोते भी ये गुनगुनाने लगती है जिंदगी भी क्या क्या सुनाने लगती है मेरे मालिक क्या तेरे मन में है छुपा रोज कुदरत भी क्यों डराने …