Category: गिरधर गोपाल

शरद की हवा

शरद की हवा ये रंग लाती है, द्वार-द्वार, कुंज-कुंज गाती है। फूलों की गंध-गंध घाटी में बहक-बहक उठता अल्हड़ हिया हर लता हरेक गुल्म के पीछे झलक-झलक उठता बिछुड़ा …