Category: गौरव शर्मा ‘भारद्धाज’

“दूर बस खड़े रहे”

प्रेमी युगल नए-नए स्नेह में बहे-बहे स्वतंत्र स्वाभिमान से गीत कुछ कहे-कहे आज जात-पात से मतलबी समाज से हार गए प्रेमी दोनों काबा और प्रयाग से आज अपनी हार …

रेत है खाली

समंदर पे चमकती धूप, किनारे रेत है खाली! हसीं मंज़र नहीं दिखते, अगरचे पेट है खाली! तू क्यों रूठ कर बैठा है दुनिया देखने वाले! कहीं है बाढ़ का …

“तेरा-मेरा”

तेरा शौक रहा मेरी मौत रही तुझको क्या गिला मुझको क्या गिला दिल जला जला तो जला मेरा जला तेरा क्या जला तेरी महफ़िल मेरा सूनापन एक उधर चली …

“क्यों तुम दूर चले आये”

इस तुच्छ सी काया पर प्रेम शब्द बरसा कर इस प्यासे मन को आज और अधिक उकसाकर क्यों तुम दूर चले आये ये अहम था भूखा-प्यासा क्षणिक प्रेम की …