Category: गौरव संगतानी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं …

पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद …

आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..???   कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई …

हत्थां ते लिखा नहीं मिटदा…..

हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई, हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा….. लक्ख करें जतन तू जट्टा, किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा….   लोकी पराये हो गए, ते हुए अपने …

सोचा नहीं कभी हमने

सोचा नहीं कभी हमने, क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है | क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं, आँखें क्यूँ हैरान हैं ||   सोचा नहीं कभी हमने, क्या रिश्ता ये अनजाना …

जितना जाना जिंदगी को

जितना जाना जिंदगी को, बस इतना ही जाना है जाना……                                                 कुछ भी नहीं है जानने को, बस वो पाया जिसने जो माना….   सारे पोथे, सारी बातें, मन …