Category: गंगा धर शर्मा

हूँ मैं वाहिद यहाँ ,दूसरा कौन है

बज़्म में गीत गाता हुआ कौन है. लूटता यूँ दिलों को भला कौन है. कह रहे हैं परम-आत्मा कौन है. देखना भाइयों जा-ब-जा कौन है. सोचिये आसमाँ को करीबे …

है यकीं तो फिर तैरा कर पत्थर देखो

चाहे तो पीर -पयंबर-कि कलंदर देखो मौत से छूट सके ना, कि सिकंदर देखो ये कातिल नर्म बाहें हैं हमारे यार की सिमट के इनमें खुद ही न जाए …

गरल-पान कर वो ही सागर कहलाता है

सागर जितना खारा है उतनी ही गहरी खाई है. दर्द समेटा दुनिया का, पहलू में पीर पराई है. जिसको मिलता है मान, वही बौराता है. भरा उदर ही , …

समय बड़ा बलवान

भ्रम जाल में उलझ गया सीधा सा इंसान. सूर्य ग्रहण कटु सत्य है, समय बड़ा बलवान. टूट-टूट कर आदमी,रहा जरा सा जोड़. रेशम-कीट बुनता रहा मृत्यु का सामान. हरिश्चंद्र …

26 जनवरी 1950 (गणतंत्र दिवस)

26 जनवरी 1950 (गणतंत्र दिवस) सुहानी सुबह को आसमां में लहरा उठा तिरंगा | भारत में बही थी, आज ही, गणतंत्र की गंगा || व्यक्ति स्वतंत्रता संग अभिव्यक्ति की …

बेपरवाही नहीं, प्रिया मेरी! विश्वास ह्रदय का मेरा है |

बेपरवाही नहीं, प्रिया मेरी! विश्वास ह्रदय का मेरा है | तुमको सब कुछ सौंप दिया , जो मेरा है सो तेरा है || मुक्त हुआ , कुछ फिक्र नहीं …