Category: गणेश गम्भीर

ये शौक क्या कि पहले कोई गम तलाशिए

ये शौक क्या कि पहले कोई गम तलाशिये, फिर ज़ख्मे दिल के वास्ते मलहम तलाशिये! फसले तबाह करता है रोना फिजूल का, रोना है गर तो बढियाँ सा मौसम …