Category: एकान्त श्रीवास्तव

एक बेरोज़गार प्रेमी का आत्मालाप

जो भूखा होगा प्‍यार कैसे करेगा श्रीमान्? पार्क की हरियाली खत्‍म कैसे करेगी जीवन का सूखा? जब मैं झुकता हूं प्रेमिका के चेहरे पर चुम्‍बन नहीं, नौकरी मांगते हैं …

खाली दिन

पिछली रात टूटे हुए स्‍वप्‍न के आघात से आरम्‍भ होते हैं खाली दिन कैलेण्‍डर में कोई नाम नहीं होता खाली दिनों का न सोम न मंगल कोई तारीख नहीं …

दंगे के बाद

एक नुचा हुआ फूल है यह शहर जिसे रौंद गये हैं आततायी एक तड़का हुआ आईना जिसमें कोई चेहरा साफ-साफ दिखायी नहीं देता यह शहर लाखों-लाख कंठों में एक …

बोलना

बोले हम पहली बार अपने दुःखों को जुबान देते हुए जैसे जन्‍म के तत्‍काल बाद बोलता है बच्‍चा पत्‍‍थर हिल उठे कि बोले हम सदियों के गूंगे लोग पहली …

पाणिग्रहण

जिसे थामा है अग्नि को साक्षी मानकर साक्षी मानकर तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं को एक अधूरी कथा है यह जिसे पूरा करना है इसे छोड़ूंगा तो धरती डोल जाएगी ।

अनाम चिड़िया के नाम

गंगा इमली की पत्तियों में छुपकर एक चिड़िया मुँह अँधेरे बोलती है बहुत मीठी आवाज़ में न जाने क्या न जाने किससे और बरसता है पानी आधी नींद में …

जन्मदिन

आकाश के थाल में तारों के झिलमिलाते दीप रखकर उतारो मेरी आरती दूध मोंगरा का सफ़ेद फूल धरो मेरे सिर पर गुलाल से रंगे सोनामासुरी से लगाओ मेरे माथ …

हम तिलचट्टों की तरह (समर्पण पृष्ठ)

हम तिलचट्टों की तरह पैदा नहीं हुए नीम अंधेरों में दीमकों की तरह नहीं सीलन भरी जगहों में उस आदिम स्त्री की कोख में मनु का पुआर बनकर गिरे …

रास्ता काटना

भाई जब काम पर निकलते हैं तब उनका रास्ता काटती हैं बहनें बेटियाँ रास्ता काटती हैं काम पर जाते पिताओं का शुभ होता है स्त्रियों का यों रास्ता काटना …

भाई की चिट्ठी

हर पंक्ति जैसे फूलों की क्यारी है जिसमें छुपे काँटों को वह नहीं जानता वह नहीं जानता कि दो शब्दों के बीच भयंकर साँपों की फुँफकार है और डोल …

भाई का चेहरा-1

एक धुंध के पार उभरता है भाई का चेहरा हवा में, अग्नि में, जल में, धरती में, आकाश में शामिल होता हुआ भाई देखता होगा आख़िरी बार मुझे पलटकर …

नहीं आने के लिए कहकर

नहीं आने के लिए कह कर जाऊंगा और फिर आ जाऊंगा पवन से, पानी से, पहाड़ से कहूंगा– नहीं आऊंगा दोस्तों से कहूंगा और ऎसे हाथ मिलाऊंगा जैसे आख़िरी …

नमक बेचने वाले

(विशाखापट्टनम की सड़कों पर नमक बेचने वालों को देखकर) ऋतु की आँच में समुद्र का पानी सुखाकर नमक के खेतों से बटोरकर सफ़ेद ढेले वे आते हैं दूर गाँवों …