Category: दुष्यन्त

माउण्‍ट आबू से प्रेम कविताएं

1 एक अकेली दोपहर स्मृति तुम्हारी पहाड़ के निचले हिस्से में उस पल पहाड़ से ऊंची हो जाती है जैसे तुम्हारा गुस्सा पहाड़ होता था कभी मेरी प्रिया! 2 …

समय-4

समय नहीं है घड़ी में घंटा-मिनट-सैकंड की सूई का मोमेंटम समय है इतिहास के पन्नों पर अंकित होते आखर-आखर दुख, सुख, खुशियाँ, नाकामयाबियाँ और कामयाबियाँ… सचमुच समय नहीं है …

मेरा-तुम्हारा

सांझा अपना इतिहास सांझा अपना वर्तमान तुम्हारे दुख में शामिल मेरा दुख तुम्हारे सुख में शामिल मेरा सुख जैसे मेरे सुख में शामिल तुम्हारा सुख मेरे दुख में शामिल …

यह मेरी सबसे उदास कविता है

टूटना शरीर का टूटना वृक्ष का या किसी इमारत का टूटना सचमुच बहुत मायने रखता है परन्तु सपने का टूटना उम्मीद का टूटना और उससे भी दुखदाई होता है …

आप-1

आपके दर्शन आपसे ज्यादा सार्थक शायद ! आपकी अनुभूति, अपने आस-पास, आपके होने से ज्यादा अर्थवान है। आपके होने से केवल अनुभूति में उग जाता है मेरा सूरज ! आपके होने …