Category: दिविक रमेश

सम्पूर्ण यात्रा

प्यास तो तुम्हीं बुझाओगी नदी मैं तो सागर हूँ प्यासा अथाह। तुम बहती रहो मुझ तक आने को। मैं तुम्हें लूँगा नदी सम्पूर्ण। कहना तुम पहाड़ से अपने जिस्म …

यह कैसी ज़िद है

यह कैसी ज़िद है महाप्रभु कि जो मिलना ही चाहिए उसे भी माँगू और वह भी फैलाकर हाथ गिड़गिड़ाकर नाक रगड़कर। क्यों? यह कैसी ज़िद है महाप्रभु जिसे देना …

बेटी ब्याही गई है

बेटी ब्याही गई है गंगा नहा लिए हैं माता-पिता पिता आश्वस्त हैं स्वर्ग के लिये कमाया हॆ कन्यादान का पुण्य। और बेटी ? पिता निहार रहे हैं, ललकते से निहार …

बहुत कुछ है अभी

कितनी भी भयानक हों सूचनाएँ क्रूर हों कितनी भी भविष्यवाणियाँ घेर लिया हो चाहे कितनी ही आशंकाओं ने पर है अभी शेष बहुत कुछ बहुत कुछ जैसे होड़। अभी …

प्रिय भाई! प्रिय आलोचक!

एक आवाज़ है, बहुत सधी, लेकिन मौन पूछती सी कौन? एक प्रश्न है यही बहुत सरल नहीं जिसका उत्तर अगर देना पड़े खुद अपने संदर्भ में, और वह भी …

चलो सुनाओ नयी कहानी

अगर सुनानी तो नानू बस झट सुना दो एक कहानी देर करोगे तो सच कहती अभी बुलाती हूँ मैं नानी बोली डोलू बहुत ’बिजी‘ हूँ तुम तो नानू बिल्कुल …