Category: दीनदयाल शर्मा

कर्म ही पूजा

कितना सारा काम करूँ मैं फिर भी गधा कहाता किससे कहूँ मैं पीड़ा अपनी किसे नियम बतलाता। लादो चाहे कितना बोझा चुपचाप लदवाता मैं भी करूँ आराम कभी तो …

मेरे घर आया मेहमान

मेरे घर आया मेहमान मानूँ मैं उनको भगवान रोज रोटियाँ दाल बनाते आज बने हैं पकवान। घर की बैठक को सजाया सबने अनुशासन अपनाया करते भाग-भाग कर पूरे उनके …

गाँधी बाबा आ जाओ तुम

गाँधी बाबा आ जाओ तुम सुन लो मेरी पुकार, भूल गए हैं यहाँ लोग सब, प्रेम, मोहब्बत प्यार । शांति, अमन और सत्य-अहिंसा पाठ कौन सिखलाए , समय नहीं …

गाँधी-शास्त्री

गाँधी-शास्त्री सबके प्यारे हम सबके हैं राज दुलारे । हम सब सीखें इनसे जीना, ये हैं सबकी आँख के तारे । संकट में ना ये घबराएँ सत्य अहिंसा हमें …

अकड़

अकड़-अकड़ कर क्यों चलते हो चूहे चिंटूराम, ग़र बिल्ली ने देख लिया तो करेगी काम तमाम, चूहा मुक्का तान कर बोला नहीं डरूंगा दादी मेरी भी अब हो गई …