Category: धीरज आमेटा ‘धीर’

हर दिन तो नहीं बाग़, बहारों का ठिकाना!

हर दिन तो नहीं बाग़, बहारों का ठिकाना! गुलदान को काग़ज़ के गुलों से भी सजाना! मुश्किल है चिराग़ों की तरह खुद को जलाना! भटके हुए राही को डगर …

शायर ए फ़ितरत की बातें उनके बस की ही नहीं!

शायर-ए-फ़ितरत की बातें उनके बस की ही नहीं, जिनको तौफ़ीक़ ए सुखन-फ़हमी खुदा ने दी नहीं! एक दिन गुल अपने हिस्से के लुटा कर देखिए, मुद्दतों तक उन की …

वो जो चाँद-तारों के ख्वाब को भी सिराहने छोड़ सका नहीं

वो जो चाँद-तारों के ख्वाब को भी सिराहने छोड़ सका नहीं, उसे खाक़ चैन नसीब हो, जो हक़ीक़तों मे जिया नहीं! तुझे ये समझ के भुला दिया कि मिरे …

वहीं पे जा कर उलझ रहा है, जहां से दामन छुड़ा रहे हैं!

वहीं पे जा कर उलझ रहा है, जहां से दामन छुड़ा रहे हैं! चले थे जिस दर से बेखुदी में, उसी को फिर खट-खटा रहे हैं, सिमट के चादर …

धीर! अपने ही दामन को, बेदाग़ बनाना है!

धीर! अपने ही दामन को, बेदाग़ बनाना है, फिर जा के ज़माने को आईना दिखाना है! अब तेरी मुहब्बत भी इक भूला फ़साना है, इक बंद लिफ़ाफ़ा है, …

दिल जुनूँ-पेशा है, दिल शौक़ से होता है फ़िगार!

दिल जुनूँ-पेशा है, दिल शौक़ से होता है फ़िगार, लाख समझाता हूँ, तूफ़ान में कश्ती न उतार! हमने देखा था जिन आँखों में फ़क़त प्यार ही प्यार, क्यों मुक़द्दर …

ज़िन्दगी के पेच ओ खम से हम न थे वाक़िफ़ मगर!

ज़िन्दगी के पेच ओ खम से हम न थे वाक़िफ़ मगर, हम जिए,दिल से जिए,छोड़ी नहीं कोई कसर! तू सरापा खूबसूरत थी, मगर ऐ ज़िन्दगी! हम ने पाई ही …

जब गुलाब इश्क़ का सीने में खिला देते हैं लोग!

जब गुलाब इश्क़ का सीने में खिला देते हैं लोग एक सहरा को गुलिस्तान बना देते हैं लोग! अपने दामन को भी ख़ुद आप जला देते हैं लोग, जब …

ख्वाब देखा था जो मैने वो मुकम्मल होगा!

ख्वाब देखा था जो मैंने वो मुकम्मल होगा, मुझ को उम्मीद है, आबाद मेरा कल होगा! धीरे-धीरे ही सही नूर की आमद होगी, दिल की आंखोँ से धुआं एक …

एक नज़्म अपनी हमनफ़स के नाम!

मिरी जाँ तेरी आँख खुलने से पहले चला हूँ मैं ये रात ढलने से पहले! मैं पत्तों से थोड़ी-सी शबनम उठा लूँ, मैं सूरज की पहली किरण को चुरा …

उमीदें जब भी दुनिया से लगाता है!

उम्मीदें जब भी दुनिया से लगाता है, दिल-ए-नादाँ फ़क़त धोखे ही खाता है! ये दिल कम्बख्त जब रोने पर आता है, ज़रा सी बात पर दरिया बहाता है! जो …

इश्क़ में क्या लुटा, किसे रोता?

इश्क़ में क्या लुटा, किसे रोता? जो न पाया था, उसको क्या खोता! एक बस चैन ही गंवाया था, रंज उसका भी कब तलक होता? दिल ने इक बद्दुआ …

अब इसी आस में जीना होगा

अब इसी आस में जीना होगा रात के बाद सवेरा होगा! गुल कहीं और कहीं काँटा होगा राह कैसी भी हो चलना होगा! सर झुकाने से फ़क़त क्या होगा? …