Category: धर्मेन्द्र कुमार निवातियाँ

देश के लाल फना हो जाते है — डी. के. निवातिया

देश के लाल फना हो जाते है *** पुराने जख्म भरते नहीं की नये फिर से मिल जाते है सेनापतियों की गैरत पे जाने क्यों ताले पड़ जाते है …

कोई नाराज नहीं चाहिये — डी के निवातिया

कोई नाराज नहीं चाहिये   कितने अमन पसंद लोग है यहाँ किसी को कोई आवाज नही चाहिये। रसूख तो खुदा के फरिश्ते जैसा हो पर रोजा -ऐ- नमाज नही …

जिन्दगी संग जुआ

जिन्दगी संग जुआ जिन्दगी के संग जुआ खेलता हूँ , रोज़ एक नया तजुर्बा झेलता हूँ , नीचता की भी परिसीमा होती है नेकी के नाम बदी करते देखता …

सत्ता कितनी प्यारी — डी के निवातिया

सत्ता कितनी प्यारी मेरे देश के हुक्मरानो को सत्ता कितनी प्यारी है रोज़ मरे मजदूर किसान सैनिको ने जान वारी है आदि से अंत तक का इतिहास उठाकर देख …

समाज का आईना — डी के निवातिया

समाज का आईना *** आज अचानक वर्षो के  बाद  विद्यार्थी जीवन में पढ़ी तुलसी जी की वो पंक्तिया एक बच्चे ने उस समय  फिर याद करा दिया, जब वह …

इरादे मजबूत रखना — डी. के. निवातिया

इरादे मजबूत रखना *** नफरत करनी है अगर हमसे तो इरादे मजबूत रखना ! लड़ना पड़ेगा मुकदमा इश्क कि अदालत सबूत रखना !! हुई जो जरा भी चूक तुमसे, …

सोशल साईट हुई मेहरबान — डी. के. निवातिया

नवयुग में लोगो पर सोशल साईट हुई मेहरबान है व्हाट्सएप, फेसबुक पर हर कोई बाँट रहा ज्ञान है सीखने वाले भी वही यंहा, सिखाने वाले भी वो ही फिर …

रांझे की हीर — डी. के. निवातिया

रांझे की हीर कल तक करते देखा था मुहब्बत कि खिलाफत जिनको। आज शिद्दत से करते पाया एक रांझे कि वकालत उनको । ऐसा क्या हुआ, फिजा-ऐ-मिजाज़ ही बदल …

अलबेला हूँ — डी के निवातिया

अलबेला हूँ ! भीड़ में खड़ा हूँ, फिर भी अकेला हूँ कदाचित इसीलिए मै अलबेला हूँ ! ! शोरगुल में धँसा पड़ा हूँ आफतो में फँसा पड़ा हूँ रोता …

हमारा पर्यावरण और धार्मिक श्रद्धा — डी के निवातिया

आज जब भी हम किसी विषय पर बात करते है बिना उसकी वास्तविकता को जाने पहचाने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करके अपना फर्ज पूरा कर देते है,  या फिर किसी …

अब मुझको वो कर दिखाना है — डी. के. निवातिया

( उपेक्षा के शिकार सकारात्मक भाव रखने वाले बालको को उत्साह पूर्ण जीवन शैली के लिए प्रेरित करती मेरी और से नव पीढ़ी को समर्पित रचना )   —:: …

व्याकुल इंसान – – – डी के निवातिया

व्याकुल इंसान   दरखत झूमे, सरोवर तीर, निर्झर निर्झर बहे बयार पर्ण:समूह के  स्पंदन से, सरगम की निकले तान शीतल प्रतिच्छाया में, पंछी समूह करते विहार मानुष त्रस्त अविचल, …

मौसम गर्मी का — डी. के. निवातिया

मौसम गर्मी का सूरज ने जब दिखलाई  हेकड़ी तरबूज बोला फिर मुँह फुलाये तू करेगा जितना ज्यादा तंग भाव मेरा उतना ही बढ़ जाये ! ! खीरा, ककड़ी, और …

कतराने लगे है लोग — डी के. निवातिया

कतराने लगे है लोग   अब तो किसी को पानी पिलाने से भी कतराने लगे है लोग ! क्या कहे सामूहिक भोज भी मुँह देख खिलाने लगे है लोग …

मैं और तू — डी. के. निवातिया

मैं और तू *** शीर्ष लोम से चरण नख तक एक तेरे ही नाम से बंधी हूँ मैं अंग अंग किया अर्पण तुझ पर सौगंध के वचनों में सधी …

ढोंग पाखण्ड संसार में — डी के निवातिया

ढोंग पाखण्ड संसार में नवदुर्गा के नाम पर भक्त बने हजार भूखे रहकर जता रहे भक्ति व प्यार जीवन में नारी को सम्मान दिया नही मंदिर में लगा रहे …

सच्चाई दिखलाता हूँ — डी. के. निवातिया

सच्चाई दिखलाता हूँ नित्य कर्म की तरह सुबह कार्यशाला के लिए प्रस्थान करने से पहले, तैयार होते हुए जीवन की व्यस्तता में टीवी पर खबरे देख सुन रहा था …

ऐ जिंदगी — डी. के. निवातिया

ऐ जिंदगी बहुतो को तरसाया तूने बहुतो को रुलाया है बड़ी मशरूफ और मगरूर है तू ऐ जिंदगी न जाने कितनो का दिल तूने दुखाया है जरा ये भी …

मेरा- मेरा सब कहे – डी. के. निवातिया

कुण्डलिया ******************* मेरा- मेरा सब कहे , मैं  में  खोया देश ! दोष राखे सब दुसरे ,  लूटे भर के  भेष !! लूटे भर के  भेष, समझ कोई  ना …

वक़्त का दौर — डी. के. निवातिया

वक़्त का दौर   लोग पूछते है हाल कैसे है जनाब के अब कैसे बताये किस तरह गुजर रही है जिंदगी ! वक़्त के उस दौर से गुजरा हूँ …

अमर कहानी — डी के निवातिया

शहीद दिवस पर अमर बलिदानी भगत सिंह, राजगुरु व् सुखदेव जी को श्रद्धा सुमन अर्पित और कोटि कोटि नमन ।। देश की खातिर सर्वस्व लुटाकर लिखी अमर कहानी थी। …

सुसंगत — दोहे — डी. के. निवातिया

दोहे मोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव ! कोइ कथन बने औषधि, कोइ दे घने घाव !!………..(१) दोस्त ऐसा  खोजिये, बुरे  समय  हो  साथ ! सुख में …

आईना सच बोलता है

कल ही की बात है बात हो रही थी दोस्त थे बड़े गर्व से कह रहा था कि आईना सच बोलता है ! प्रत्युत्तर में मैंने कहा, शायद ऐसा …