Category: धर्मेन्द्र कुमार निवातियाँ

तन्हा रहने लगे – डी के निवातिया

तन्हा रहने लगे *** पास होकर भी हम तन्हा-तन्हा रहने लगे, जब से एक दूजे को हम बेवफ़ा कहने लगे । इन्हे नादानियों का नाम दे या गलतफहमियां, इनमे …

आड़ में – डी के निवातिया

समस्त राजनीतिक दलों को समर्पित आड़ में ! ये तुम्हारा चुनाव आयोग जाये भाड़ में नियम कायदे क़ानून सब गए कबाड़ में सही गलत क्या है ये फैसला हम …

तन्हा – डी के निवातिया

तन्हा *** कहाँ चल दिये हमे तन्हा छोड़ के बेदर्दी से ये नाज़ुक दिल तोड़ के क्या रह पाओगे खुद भी चैन से छोड़कर हमे ऐसे नाज़ुक मोड़ पे …

माँ – डी के निवातिया

 “माँ” किसी भी हाल में, हर पल खुशी देती है माँ, अपनी ज़िंदगी से सबको जीवन देती है माँ, भगवान से पहले, माँ की पूजा करो जनाब, क्योंकी भगवानों …

वीर जवान, चल हो तैयार – डी के निवातिया

*वीर जवान, चल हो तैयार* … मातृभूमि कहती भर हुंकार, उठा शीश और सीना तान चल हो तैयार, वीर जवान, चल हो तैयार, वीर जवान।। गंगा होगी कब तक …

किनारा – डी के निवातिया

किनारा मझदार में टूटी कश्ती को किनारा नहीं मिलता, मन के अंधेरों में खोये को,उजियारा नहीं मिलता संभलकर चल राही, अपने वक़्त को पहचानकर बीता हुआ लम्हा जिंदगी में …

होली – डी के निवातिया

शीर्षक :- मैं होली कैसे खेलूँ रचनाकार:- डी के निवातिया ! विषय : – होली कोई रंग न मोहे भाये, मोरा दिल चैन न पाएं मै होली कैसे खेलूँ, …

काम जोरो पर है – डी के निवातिया

काम जोरों पर है +++ *** फूटी किस्मत लिखी, कागज़ कोरों पर है, खुद करके काली करतूत दोष औरों पर है !! टूट-फूट कर बिखरें, भू-माता के टुकड़ें उनकी …

भँवर – डी के निवातिया

  भँवर से निकलूँ तो किनारा मिले, ज़िंदगी को जीने का सहारा मिले बड़ी उलझन में है हर एक लम्हा काश किसी अपने का सहारा मिले !! ! डी …

अयोध्या विवाद का पूरा इतिहास

अयोध्या विवाद का पूरा इतिहास, जानें अब तक क्या-क्या हुआ, 25 बड़ी बातें अयोध्या में मंदिर मस्जिद के लिए मुकदमा लड़ते सवा सौ साल हो गया है. इस एक …

आज की नारी – डी के निवातिया

आज की नारी *** घूँघट त्याग, नज़र से नज़र मिलाने लगी है, नारी शक्ति अपनी ताकत दिखाने लगी है !! घुट-घुट के जीना बीते दिनों की बात हुई, खुलकर …

नया बवाल – डी के निवातिया

नया बवाल ! न जाने लोगो ने जहन में क्या पाल रखा है, जिसे देखो सबके पास नया बवाल रखा है, फिक्रमंद जो दिखते ज्यादा मुल्क के लिए उन्होने …

शोलो से लड़ना होगा – डी. के. निवातिया

शोलो से लड़ना होगा *** सहते – सहते, सह  रहे है हम, सदियों से आतंक की अठखेलियां, कितने आये कितने गए सत्तारूढ़ बुझा रहे आजतक सिर्फ पहेलियाँ, कुछ तो …

वैलेंटाइन-डे – डी के निवातिया

वैलेंटाइन-डे *** देशी चमड़ी को विदेशी पहरन से सजाते है, प्रेम नाम पर पार्को होटलो में रंग जमाते है, सरेआम अश्लील फूहड़ता का नंगा नाच कर, आ चल हम …

” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी )

साहित्य प्रेमियों के लिए ख़ुशी की बात है की साहित्य समूह के कुछ सदस्यों ने एक साथ मिलकर एक पुस्तक ” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी ) का सफल …

हमारी हम, तुम्हारी तुम जानों – डी के निवातिया

हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों *** *** *** ! तुम में रमते हम और हम में तुम हो ये एहसास-ऐ-दिल कभी तो पहचानों सच, करीब कितने है हम …

गणपति वंदना – डी के निवातिया

  🙏गणपति वंदना🙏 उमासुत, गजानन, हे गणपति नाथ, अब तो आओ मेरे द्वार। तुम ही मेरे जीवन रक्षक, एक तुम ही तो हो मेरे पालनहार ।। तुम जो मेरे …

क्या कहना – डी के निवातिया

क्या कहना ! मेरे देश के चौकीदारों का, क्या कहना, भई क्या कहना। एक से बढ़कर एक आया, कोई भाई बनकर, कोई बहना ।। क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना। …

ख़फा क्यों है – डी के निवातिया

ख़फा *** वो शख्स मुझसे इतना ख़फा क्यों है बेवफाई में ढूंढता वो वफ़ा क्यों है !! कभी चाहत, कभी नफरत-ऐ-अदा मिज़ाज़ उनका दो-तरफा क्यों है !! इक – …

दर्द किसी का – डी के निवातिया

दर्द किसी का कोई जब समझने लगे समझो आदमियत उसकी जगने लगे शराफत के आसमान में कुहासा घना है हैवानियत की गर्द भी कुछ छटने लगे !! ! ! …

क्या तुमने कभी देखा है – डी के निवातिया

क्या तुमने कभी देखा है ? ! अपने इर्द-गिर्द सर्द दीवाली को गर्मी में हाँफते हुए टूटे सपनों में सिमटी गरीबी को आँचल ढांपते हुए आतिशबाज़ी की गड़गड़ाहट में …

समीक्षा- डी के निवातिया

समीक्षा *** संसद की गलियां भी कुछ अब तंग होनी चाहिए हुक्मरानो के खिलाफ भी एक जंग होनी चाहिए हकीकत में जो पा रहे क्या सच में पाने लायक …