Category: धर्मेन्द्र कुमार निवातियाँ

वक़्त का दौर — डी. के. निवातिया

वक़्त का दौर   लोग पूछते है हाल कैसे है जनाब के अब कैसे बताये किस तरह गुजर रही है जिंदगी ! वक़्त के उस दौर से गुजरा हूँ …

अमर कहानी — डी के निवातिया

शहीद दिवस पर अमर बलिदानी भगत सिंह, राजगुरु व् सुखदेव जी को श्रद्धा सुमन अर्पित और कोटि कोटि नमन ।। देश की खातिर सर्वस्व लुटाकर लिखी अमर कहानी थी। …

सुसंगत — दोहे — डी. के. निवातिया

दोहे मोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव ! कोइ कथन बने औषधि, कोइ दे घने घाव !!………..(१) दोस्त ऐसा  खोजिये, बुरे  समय  हो  साथ ! सुख में …

आईना सच बोलता है

कल ही की बात है बात हो रही थी दोस्त थे बड़े गर्व से कह रहा था कि आईना सच बोलता है ! प्रत्युत्तर में मैंने कहा, शायद ऐसा …

मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई — डी के. निवातिया

ना पूछो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई फ़ज़ीहत आजकल जमाने में आम हुई जिस्म के भूखे है लोग, प्रेम क्या जाने सुबह मिले, शाम तक काम तमाम हुई !! …

आज का नवयुवक — डी. के. निवतिया

अजीब हाल में दिखता आज का नवयुवक जागा हुआ है, मगर कुछ खोया खोया सा हँसता हुआ दिखता, पर कुछ रोया-रोया सा जीवन संघर्ष की दौड़ में, जा रहा …

जगाने आया हूँ — डी के निवातिया

न कोई हंगामा न कोई बवाल करने आया हूँ बिगड़े हुए हालातो से आगाह करने आया हूँ सोये हुए है आजादी के दीवाने कई बरसो से गहरी नींद से …

सेहरा — शेरो शायरी — डी के निवातिया

लो सज गए वो फिर से पहनकर सेहरा भी, अरे कोई तो जाकर उन्हें हमारी याद दिलाये ! हम ख़ाक में मिल गए उनके एक इशारे पर और वो …

यादो का रंग — डी. के. निवातिया

भीगे तन पे जलन का अहसास दे गया मौसम भी फाग का बड़ा बेईमान निकला ! ! रंग होली का भी न चढ़ने दिया इस बार तेरी यादो का …

रावण बदल के राम हो जायेंगे—डी. के. निवातिया

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे। इस शहरे-ऐ-अमन में, दंगे तमाम हो जायेंगे !! न छेड़ो दुखती रग को, अगर आह निकली !   नंगे यंहा सब …

मोहे प्रीत के रंग रंगना — डी. के. निवातिया

रंग से नही रंगना, सजन मोहे अपने रंग में रंगना ! कच्चे रंग दिखावे के, मोहे प्रीत के पक्के रंग रंगना !! ! बारह महीनो चढ़ा रहे, मोहे फाग …

होली (हाइकु) — डी. के. निवातिया

होली के रंग उड़ाये संग संग मिलके हम  ! ! प्रेम रंग में रंगे उठारगम हर्षाये मन ! ! फागुन मास लहलाये फसल छिटके रंग ! ! धानी चुनर …

बिटिया रानी…..चली गयी –डी. के. निवातिया

(यह रचना बिटिया की विदाई के बाद घर में उपजे माहौल पर प्रकाश डालती है, इसका पूर्ण आनंद लेने के लिए ह्रदयतल की गहराइयो में उतर कर रसास्वादन करे …

मैं नारी हूँ —डी. के. निवातिया

जग जननी हूँ, जग पालक हूँ   मैं नारी हूँ, न किसी से हारी हूँ निःशेष लोक जन्मा मेरे उर से   फिर भी मैं ही कोख में मारी …

हम बच्चे मस्त कलंदर — डी के निवातिया

एक मुट्ठी में सूरज का गोला एक में लेकर  चाँद सलोना खेलने निकले हम अम्बर पे करके सितारों का बिछोना ! हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना …

रोना—डी के निवातिया

रोना तो बस मन का बहलावा रोकर इंसान हर दर्द सह जाता आंसुओं में अगर होती ताकत ये ज़माना कब का बह जाता । मत लुटाना ये बेशकीमती मोती …

मन की बाते—डी के निवातिया

आवश्यक सूचना (यह राजनितिक हालातो के परिपेक्ष्य पर लिखी गयी है इसका किसी व्यक्ति विशेष से कोई सम्बन्ध नहीं है ) (मन की बाते) कभी जनता को मन की …

मधुमास — डी के निवातिया

इस बार मधुमास में फिर खेलेंगे होली हम  तेरी यादो संग   मोतियों से भी बेशकीमती शबनमी अश्रु जल में घुले होंगे अनेको अनूठे रंग कुछ प्रेम के, कुछ …

बधाई सन्देश

बधाई सन्देश आपके निश्छल प्रेम, सहयोग और आशीर्वाद से प्राप्त प्रतिफल के प्रतीक इस प्रमाण पत्र के  लिए आप सभी साथियो का तहदिल से धन्यवाद एवं कोटि कोटि आभार व्यक्त …

सच क्या होता है—डी के निवातिया

(सच क्या होता है) हमने जो पूछ लिया सच क्या होता है ! तिलमिला के बोले ऐसे न बयां होता है !! लांघ रहे हो आदो-अदब का दायरा जनाब …

महादेव—डी के निवातिया

ज   पाप पुण्य के युद्ध में जो खुद को मिटाता है। त्याग कर अमृत हलाहल विष अपनाता है। निस्वार्थ लोकहित में जीवन अर्पण कर दे। वो स्वयंशंभू, नीलकंठ, …

जुर्म—डी के निवातिया

वो करते सवाल तो जवाब हम देते हर जुर्म अपने सर आँखों पर लेते कम से कम गुनाह तो बताया होता फिर चाहे सजा-ऐ-मौत क्यों न देते।। ! ! ! …

एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है। जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।। क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के जिसे मानो अपना …

हमारे नेता—डी के निवातिया

विकास की डोर थाम ली है हमारे नेताओ ने । अब नये शमशान और कब्रिस्तान बनायेंगे।। कही भूल न जाओ तुम लोग मजहब की बाते याद रखना इंसानियत को …