Category: धर्मेन्द्र कुमार निवातियाँ

मिटटी – डी. के. निवातिया

मिटटी *** जीवन का सार है, उत्पत्ति का आधार है जल हो या वायु संपूर्ण जगत की प्राण है मिटटी !! अम्बर को शीश धारे, प्रकृति को सीने पे …

फ़साना – डी के निवातिया

फ़साना *** तेरी मेरी कहानी का अब यही फ़साना होगा बरसेंगे तेरे मेंरे नैन बारिश का बहाना होगा !! तड़पते दो दिलो में तन्हाई का आलम होगा सिमटते रिश्तो …

सोच-सोच घबराता हूँ

ये सोच-सोच घबराता हूँ…….. *** पिता नही मेरी ताकत है, छत्र-छाया में उनकी रहता हूँ महफूज उनके संरक्षण में, निडर हो बेफिक्री से जीता हूँ छोड़ जायेंगे एक दिन …

मौन बड़ा अनमोल – डी के निवातिया

मौन बड़ा अनमोल *** मौन बड़ा अनमोल प्यारे, नही इसका कोई मोल मौन के आगे सब हारे, बोलो कितने कड़वे बोल !! मौन जब तक मौन है, दुनिया में …

पुष्प बेल – डी के निवातिया

पुष्प बेल ***** मेरे आँगन में ख़ुशियाँ खिलखिलाती है मन उपवन तितलियाँ सी फुरफुराती है धरा सी माता नभ से पिता की छाँव में बेटियों के रूप में पुष्प …

स्वंय से तुम युद्ध करो – डी के निवातिया

स्वंय से तुम युद्ध करो बुद्ध को तुम प्रबुद्ध करो आत्मा को शुद्ध करो चैतन्य सर्व प्रबल हो स्वंय से तुम युद्ध करो !! अभीष्‍टता आस करो सत्य का …

शहर की आबो-हवा – डी के निवातिया

शहर की आबो-हवा रुक सा गया है वक़्त क्यूँ थम सा गया है रवानी से बहता लहू, अब जम सा गया है कुछ तो गड़बड़ है, शहर की आबो-हवा …

दीवाना – डी के निवातिया

दीवाना ___ मै दीवाना, तेरी कातिल अदाओ पे मरने आ गया लुटां के जां इस जुर्म का जुर्माना भरने आ गया !! मुहब्बत करते देख जमाने को बाते बहुत …

योग – डी के निवातिया

योग >< नेता तोंदू राम थे, करे दिवस का योग ! योगी बने एक दिन के, बरस लगावे भोग !! योग नाम पे लूट रहे, कर दिखावे का ढोंग …

गीत झूठे खुशहाली के – डी के निवातिया

गीत झूठे खुशहाली के *** ऐ राजनीति झूठे वादों पर मत जा बंद नयनो को ज़रा खोलकर देख ! आसमा छूने वाले धरा पर मति ला हकीकत को सच …

मन रुपी मानुष – डी के निवातिया

मन रुपी मानुष.. श्रावण छवि धारण कर ली, मन-मस्तिष्क के घुमड़ते मेघो ने, वर्षा होने लगी है अब, नयनो के समुन्द्र से अश्को की, ध्वंसावशेष के अवयव में, कुछ …

ठीक नहीं – डी के निवातिया

ठीक नहीं *** बात दिल की दिल में छुपाना ठीक नहीं ! फ़ासले अपनों के बीच बनाना ठीक नहीं ! जिंदगी में रक्खो अपने काम से काम यारो ! …

पायल – डी के निवातिया

“पायल” *** तुम जितना धीरे चलती हो, पायल उतना शोर करती है ! धड़कने दिल कि बहक जाती है, ये गज़ब का जोर करती है !! रह-रहकर यूँ सताती …

सुकून – डी के निवातिया

सुकून *** जब मन उदास होता है यादो के बादल घुमड़ आते है गरजते है, बरसते है, तड़पाते है, डराते है, तन्हा मन घबराने लगता है फिर, झूम-झूम कर, …

मेरे जीवन साथी – डी के निवातिया

परिणय बंधन कि वर्षगाँठ पर अर्धांगिनी को समर्पित मेरे ह्रदय के भाव *** मेरे जीवन साथी, मेरे मनमीत हो तुम मेरे जीवन पथ का, मधुर संगीत हो तुम तुम …

मुकाम बाकी है – डी के निवातिया

मुकाम बाकी है *** अभी तो बहुत से काम बाकी है जोड़ना नाम संग नाम बाकी है ! अपने हौसलों को ज़रा उड़ान दे अभी पाने कई मुकाम बाकी …

तुम न समझे – डी के निवातिया

  तुम न समझे *** बहुत बुझाई पहेलियाँ, मगर कोई सवाल तुम न समझे ! समझ गई दुनिया सारी कितने हुए बवाल तुम न समझे !! टूट गए हम …

ज्ञान बांच रहा है – डी के निवातिया

ज्ञान बांच रहा है +++ जिसे देखो आज वो ही ज्ञान बांच रहा है बच्चा बूढ़ा और जवान संग नाच रहा है धर्म-कर्म की गंगा बह रही है कलयुग …

प्रेम की लौ – डी. के. निवातिया

कोई कली जब फूल बनकर महक उठती है, उसे देख तबियत भंवरे कि चहक उठती है, महकने लगता है अहले चमन खुशबू से, सूने दिल मे भी प्रेम की …

भूख – डी के निवातिया

भूख *** ये भूख जाने कैसी है, मिटती नहीं तन-मन को तृप्ति, मिलती नहीं जो जितना अधिक पा जाता है चाहत फिर दोगुना बढ़ जाता है कोई दो जून …

दिल और दिमाग – डी के निवातिया

दिल और दिमाग कह लेने दो दिल की बाते, मिला आज मौका है दिल का नहीं भरोसा, अक्सर खा जाता धोखा है दिल और दिमाग कब देतें है साथ …

गर्मियों की छुट्टियां- बाल कविता – डी के निवातिया

गर्मियों की छुट्टियां +++ मई जून का जब महीना आया बाल गोपालो का मन हर्षाया पढ़ाई-लिखाई से मनवा रूठा टीचर की डाँट से पीछा छूटा !!    अब सुबह …

मै भारत माता बोल रही हूँ – डी के निवातिया

मै भारत माता बोल रही हूँ *** जंजीरों में जकड़ी हूँ मै भारत माता बोल रही हूँ ह्रदय में उठती पीड़ा चन्द शब्दों में खोल रही हूँ ।। कोई …

आँचल में झांकना होगा – डी के निवातिया

आँचल में झांकना होगा * जमाने पे ऊँगली उठाने से पहले जांचना होगा हमको पहले खुद के आँचल में झांकना होगा गुनहेगारो के गुनाह पर नज़र डालने से पहले …