Category: धनी धरमदास

हम सत्त नाम के बैपारी

हम सत्त नाम के बैपारी। कोइ-कोइ लादै काँसा पीतल, कोइ-कोइ लौंग सुपारी॥ हम तो लाद्यो नाम धनी को, पूरन खेप हमारी॥ पूँजी न टूटै नफा चौगुना, बनिज किया हम …

साहब तेरी देखौं सेजरिया हो

साहब तेरी देखौं सेजरिया हो॥ लाल महल कै लाल कंगूरा, लालिनि लाग किवरिया हो। लाल पलँग कै लाल बिछौना, लालिनि लागि झलरिया हो॥ लाल साहेब की ललिनि मूरत, लालि …

नाम क रंग मंजीठ, लगै छूटै नहिं भाई

नाम क रंग मंजीठ, लगै छूटै नहिं भाई। लचपच रहो समाय, सार तामैं अधिकाई। केती बार धुलाइये, दे दे करडा धोय। ज्यों-ज्यों भट्ठी पर दिए, त्यों-त्यों उज्ज्वल होय॥

झरिलागै महलिया, गगन घहराय

झरिलागै महलिया, गगन घहराय। खन गरजै, खन बिजरी चमकै, लहर उठै सोभा बरनि न जाय॥ सुन्न महल से अमरित बरसै, प्रेम अनंद होइ साध नहाय॥ खुली किवरिया मिटी अंधियरिया, …