Category: घाघ

खेत में बोवाई की कहावतें

(1) कन्या धान मीनै जौ। जहां चाहै तहंवै लौ।। {कन्या की संक्रान्ति होने पर धान (कुमारी) और मीन की संक्रान्ति होने पर जौ की फसल काटनी चाहिए।} (2) कुलिहर …

खेत में जोत की कहावतें

(1) गहिर न जोतै बोवै धान। सो घर कोठिला भरै किसान।। {गहरा न जोतकर धान बोने से उसकी पैदावार खूब होती है।} (2) गेहूं भवा काहें। असाढ़ के दुइ …

खेत में पैदावार की कहावतें

रोहिनी जो बरसै नहीं, बरसे जेठा मूर।  एक बूंद स्वाती पड़ै, लागै तीनिउ नूर।। {यदि रोहिनी में वर्षा न हो पर ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र बरस जाए तथा स्वाती …

वर्षा की कहावतें

(1) रोहिनी बरसै मृग तपै, कुछ कुछ अद्रा जाय। कहै घाघ सुने घाघिनी, स्वान भात नहीं खाय।। {यदि रोहिणी बरसे, मृगशिरा तपै और आर्द्रा में साधारण वर्षा हो जाए …

सावन मास बहे पुरवइया।

(1) सावन मास बहे पुरवइया। बछवा बेच लेहु धेनु गइया।। (अर्थात् यदि सावन महीने में पुरवैया हवा बह रही हो तो अकाल पड़ने की संभावना है। किसानों को चाहिए …