Category: देवनाथ सिंह

मन

मन होता है बड़ा जटिल । रहती है इसमे ढेरो उलझनो सटिल॥ उम्र के शुरु होने से ढलने तक। खत्म न होने वाली मकड़ जाल तक॥ मनो उलझन तलाशना …