Category: देवेश शास्त्री

खून का चक्कर

भाई भाई प्रेम में बहुत बड़ा है मोह। बहुएं आकरके सुनो करवाती हैं द्रोह।। करवाती हैं द्रोह, मोह को तुड़वाती है, घर, धन, दौलत, हार-खेत, बटवारा करवाती है। कहें …

दशहरा को नहीं मारा गया रावण!

क्वार सुदी दशमी को नहीं मारा गया रावण! ‘‘विजया दशमी यानी क्वार सुदी दशहरा को रावण मारा गया।’’ यह महापर्व सदियों से मनाया जाता है। हम और आप सभी …

मक्खन

मक्खन महंगा हो गया दूध दही है लुप्त। मक्खनबाजी चल गई, मेधा कुंठित सुप्त। मेधा कुंठित सुप्त, कहाँ उनकी है गिनती। किया धरा बेकार सुनी जाती न विनती। इनके …

खुद से कह लो पीर

जैसी है करनी रही वैसा फल का स्वाद सदकर्मों के गुणों की भी होती है म्याद सुख जाने पर दुखों का निश्चित है आरम्भ क्षणिक सफलता पर अहो क्यों …

कैसा हाहाकार है?

ये कैसा है कोलाहल कैसा हां-हाकार है । चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥ निहित स्वार्थ वश हिंसा बढ़ती। बहकावे में जनता मरती । खून की नदियाँ यहाँ …

परिचय Devesh Shastri

नाम- देवेश शास्त्री जन्म-तिथि २२-१०-१९६८ जन्म स्थान – इटावा (उत्तर प्रदेश ) प्रकाशित पुस्तकें- अपना इटावा (तीन भागों में), वरद पुत्र पंगुजी, नीराजना, ज्ञान ज्योति अप्रकाशित पुस्तकें – कृष्ण …

जयत्विष्टिकापुरी Samskrit geet

जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। गंगा-यमुना नद्योर्मध्ये, श्रेष्ठा चेयमुर्वरा धरणी। जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी।। घारं पारं करक पचारम, इति नामसु विभक्ता धरणी। जयतु जयतु अस्माकं धरणी, …

नक़ल

खुली नक़ल से देखिये, ढेरों पाये अंक। अंकपत्र पा खुश हुए बुद्धि शून्य मन रंक॥ बुद्धिशून्य मन रंक, डंक सा मारे जग सब, खडे निरुत्तर पूछे जाते यहाँ प्रश्न …