Category: देवेश दीक्षित

मूषक से साक्षात्कार

एक दिन स्वप्न में मूषक से हुआ साक्षात्कार कहने लगा वो मुझसे कर दूंगा सब बर्बाद मूषक राज हमारा नाम है नुक्सान पहुंचाना हमारा काम है पेट भरने की …

मेरे पास शब्द नहीं

मासूमियत से भरे बच्चों की मासूमियत का जवाब नहीं क्या कहूँ उनके बारे में मेरे पास शब्द नहीं पल में रोते पल में हँसते उनको ये तक ज्ञात नहीं …

अपनी मार्किट के हालात

अपनी मार्किट के हालात हैं ऐसे भटक गया कोई रास्ता हो जैसे ग्राहक कभी जब आता ऐसे एहसान उससे ले रखा हो जैसे भाव सुनकर बिदकते ऐसे बिजली का …

मुरझाया नोट

मुरझाया नोट करारा नोट, पहुंचा जब तिजोरी में लेकर अंगड़ाई सुस्ताने लगा तिजोरी में न कोई उसको दखल दे सुस्ताया अपनी तड़ी में मुरझाया नोट एक तभी दाखिल हुआ …

तेरा दुलार याद आता है

कभी तुम्हारी हंसी, कभी तेरा डांटना याद आता है। आँखों में तुम्हारे नमीं, माँ तेरा दुलार याद आता है। लगती कभी चोट मुझको, तू गले से मुझे लगाती। छोड़ …

क्योंकी मौका नहीं मिलता

जब बनती हैं पंक्तियाँ तो कागज कलम नहीं मिलता लिखना चाहता हूँ कविता मगर मौका नहीं मिलता तनहाइयों को समेटना चाहता हूँ दिल से निकलती चंद पंक्तियों में पर …

मच्छर से साक्छात्कार

मच्छर से साक्छात्कार मच्छर बैठा हाथ पर मुझे काटने के लिए हाथ झटका एक तरफ उसे भगाने के लिए नहीं काट पाया मुझे मच्छर तो आ गया मेरे स्वप्न …