Category: देवेन्द्र प्रताप सिंह ‘आग’

NSG-जब छूता ऊँचाई कोई तभी पडोसी जलते हैं

Nsg पर जश्न मनाते देश के गद्दारो पर कटाक्ष करती तथा सभी देशभक्तों से चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील करती मेरी ताजा रचना — रचनाकार -कवि देवेन्द्र …

दोगले कायर उर्फ सेक्युलर हिन्दू

दोगले, कायर हिंदू उर्फ सेक्यूलर — फैलती बिसात हो रहा है पक्षपात और हिंदू बन बैठे शतरंज वाली गोटियां छोड़ योगियों का योग करें सब माँस भोग सबने पहन …

नेह गगरिया अम्बर ने व्याकुल भू पर बरसायी है

नेह गगरिया अम्बर ने व्याकुल भू पर बरसायी है सब चहक उठे पादप पंछी गुलशन बगिया हरषायी है व्याकुल मोर पपीहा थे, कोयल भी गाना भूली थी भूला था …

चोले का करके अब बसंती रंग देख ले

बलिदानियों, वीरों का करके संग देख ले तू देशभक्ति की अजब उमंग देख ले ये हीर-रांझा ही तो सिर्फ जिंदगी नहीँ चोले का रंग के अब बसंती रंग देख …

कैराना

कैराना, आजमगढ़, विकासपुरी तथा अन्य जगहों पर इस्लामिक अत्याचार पर मौन शासन और कायर हिन्दुओं को ललकारती मेरी ताजा रचना — रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग” whatsapp -9675426080 …

कड़वा सच

जिसमें हिम्मत हो कड़वा सच पढ़ने की वही पढे इन पंक्तियों को — गौमाता ; हमारी प्यारी गौमाता शायद अब किसी को भी गौमाता की फिक्र नहीँ तभी तो …

कीमत करोड़ एक मोमीन की लाश की

धर्म से टले नहीँ जो कर्म से हिले नहीँ जो जंगलों में खायी रोटियाँ जिन्होंने घास की आज उन बलिदानियों की वंशावली बनी अपनी ही भूमि पे वजह उपहास …

दलितों के फिक्रमंद

आजमगढ़ और केरल की घटना पर दलितों के दोगले फिक्रमंदों पर मेरी पंक्तियाँ ——-दलितों के फिक्रमंद——- वेमुला की वेदना ने जिन्हें झकझोर दिया अब वो कहाँ पे दलितों के …

डिग्री डिबेट

देश के ताजा महौल पर मेरी पंक्तियाँ — घोटालो के घाव हद से भी आर-पार हुए फ़िर भी दलालों के ना पीर हुई पेट में और आस्था के अर्थ …

भगवा की आनोबान शान वो इक प्रचंड सी ज्वाला था

महावीर पुरुष महाराणा प्रताप जी की याद में अपने दिल की भावनाएँ व्यक्त करती मेरी रचना – (अवश्य पढे ) रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग” whatsapp- 9675426080 “भगवा …

“ये रिश्ता क्या कहलाता ह?”

भ्रष्ट, धूर्त नेताओं पर कटाक्ष करती मेरी ताजा रचना —— (अवश्य पढ़े) रचनाकार–कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग” whatsapp- 9675426080 “ये रिश्ता क्या कहलाता है” सब तीरंदाज बने हैं सबका …

गोधरा सा ग़दर होगा हर इक शहर

एक चेतावनी भरा गीत जेहादी मोमीनों को —- रचनाकार – कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग” whatsapp- 9675426080 “गोधरा सा ग़दर होगा हर इक शहर” भक्त की भावना से खेलो …

हद हुई दलाली की

घोटालों का अम्बार लगा फिर भी हद हुई दलाली की ख़बरंडी भी अब लगे गंदगी कीचड़ वाली नाली की उद्घोषक आजादी के वो दादुर भी सारे मूक हुए कजरी …

नादान परिंद भोग रहे फल इंसानी करतूतों के

महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों में सूखे की चपेट पर सभी से पानी बचाने की अपील करती मेरी ताजा रचना, अवश्य पढ़े रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग” whatsapp- 9675426080 …

आज हैं तैयार सत्ता के ये ठेकेदार

आज हैं तैयार सत्ता के ये ठेकेदार कुर्सियों की चाहतों में देश को लुटाने के लिए आतुर हैं ख़बरंडिया जो बेचती हैं झूट धर्म, सत्यता की अर्थियाँ उठाने के …

एक कटाक्ष bjp के नेता नकवी के वयान पर

एक कटाक्ष bjp के नेता नकवी के बयान पर —- वही नीति, वही रीति, वही चाल, वही ढाल फिर बदला ही क्या है नई सरकार में सोचा था मिलेगी …

लोकतंत्र का अपंग स्तम्भ

हुआ है अपंग लोकतंत्र का स्तम्भ चौथा नित-नित झाकियां दिखाता है बवाल की वेमुला, प्रत्यूषा पर तो मचा है हाहाकार आत्महत्या गुम हुई गभरू गौपाल की आज शक्तिमान जो …

संघ मुक्त भारत की बातें करने वालों के मुँह पर तमाचा

संघ मुक्त भारत की बातें करने वालों के मुँह पर तमाचा मारती मेरी ताजा रचना —- रचनाकार-कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग” whatsapp-9675426080 किस संघी ने कब और किसके घर …

कुत्तों की करतूत

कुत्तों की करतूत से ठेस लगी चौहान के आदर को मन्दिर भी भूलेंगे कल, जो भूले आज अनादर को लाचारो के लहू से लाल थे लव जिसके उसके ऊपर …

एक कटाक्ष मन्दिर के ठेकेदारों पर

अम्बेडकर जी के जन्मदिन पर उनके जन्मस्थान पर जानेवाले और रामजन्मदिवस पर जन्मभूमि को भूलने वाले मोदी जी को धिक्कारती मेरी ताजा रचना —- रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह …

पाखंडी इंसान

बनता महान कैसा पाखंडी इंसान आज देखो इसे कैसी मजबूरियां दिखाई दें घर में ना बेटियाँ हैं ढूंढे आज घर-घर मिले ना तो देवियों से दुरियाँ दिखाई दें बेटियाँ …

घड़ियाली गैंग

कोल्लम काण्ड पर घड़ियाली मोमबत्ती गैंग की चुप्पी पर मेरी पंक्तियाँ —- पेरिस, पेशावर, ब्रसेल्स और रक्का पर आँखे भर रोये जो दलाल वो कहाँ गये आलियान को जो …

हिंदुस्तान के 95% मोमीनों की सच्चाई

हिंदुस्तान के 95%मोमीनों की सच्चाई — चापलूसी कर चापलूस नेता आ गये हैं शहीदों की जलती चिंताओं से मजार पे सबने बिठाया खोपडी पे इन मोमिनों को फिर भी …

एक नसीहत

———-एक नसीहत ———- ऐसा ना हो अपनों की नज़रों से आज उतर बैठे तुष्टिकरण के ज़हर से ना खुद्दारी तेरी मर बैठे तू है दिनकर, तिमिर मिटाने, पहुँचा है …

दिल्ली ने अपने दिल में गर थोड़े अंगार भरे होते

अवश्य पढ़े —- “दिल्ली ने अपने दिल में गर थोड़े अंगार भरे होते” सौ-सौ पल घुट कर जीने से अच्छा इक बार मरे होते दुश्मन के हमने माफ नहीँ …