Category: देवेन्द्र प्रसाद पांडे

मैं भी इक दिन गीत लिखूँगा

मैं भी इक दिन गीत लिखूँगा इक दिन मैं भी लिखूँगा कविता मैं भी इक दिन गीत लिखूँगा अभी आजकल बहुत व्यस्त हूँ समय नहीं बिल्कुल मिल पाता एक …

अन्धकार में हैं जीवन सारा

अन्धकार में हैं जीवन सारा पथ ओझल है, लक्ष्य कठिन है क्षण लघु है, संघर्स अधिक है ढूंढ रहा हूँ प्रजवलित दीप ज्वाला अन्धकार में है जीवन सारा सकुच …

दिल्ली की हैवानियत

क्योँ कोई हो सकता है, इतना निष्ठुर क्योँ करता है ऐसी हैवानियत जिसकी गाथा होती थी अविरल जहाँ जन्मे सम्राट अनेकों, आज होता है ऐसा हाल उसका सुना था …

लो चल दिए हम मंजिल की तलाश में

लो चल दिए हम मंजिल की तलाश में हर मोड़ नया है कठिन है डगर कुछ कदम डगमगाते लक्ष्य को याद दिलाते कर विचार मन में पाना है मंजिल …

मन्जिल मिल गयी

पाना था उसको था जीवन में कुछ बांकी जैसे ज्येष्ठ में थी शर्दी सी ठंडी जाने कैसे कहाँ बात हो चली ठहरते ठहरते राहों में आखिर मंजिल मिल गयी …