Category: देशबंधु

हाथों में उलझी लकीरें

हम दीवारो -दर ही जोड़ते रहे जिंदगी कतरा -कतरा बिखरती गयी हाथों में उलझी लकीरें बंद दरवाजों में धकेलती रही पत्थर बन गए जज़्वात आग अंदर ही अंदर सुलगती …