Category: द्विज

सुर ही के भार, सूधे सबद सुकरीन के

सुर ही के भार, सूधे सबद सुकरीन के, मंदिर त्यागि करैं, अनत कं न गौन। द्विजदेव त्यौं ही मधु भारन अपारन सौं, नैकु झुकि झूमि रहे, मोगरे मरुअ दौन॥ …

मदमाती रसाल की डारन पै चढ़ि ऊँचे से बोल उचारती हैँ

मदमाती रसाल की डारन पै चढ़ि ऊँचे से बोल उचारती हैँ । कुल कानि की कान करै न कछू मन हाथ पराए ही पारती हैँ । कोऊ कैसी करै …

भ्रमे भूले मलिंदनि देखि नितै

भ्रमे भूले मलिंदनि देखि नितै, तन भूलि रहैं किन भामिनियां। द्विजदेव जू डोली-लतान चितै, हिये धीर धरैं किमि कामिनियां॥ हरि हाई ! बिदेस में जाइ बसे, तजि ऐसे समैं गज …

बोलि हारे कोकिल, बुलाई हारे केकीगन

बोलि हारे कोकिल, बुलाई हारे केकीगन, सिखैं हारीं सखी सब जुगति नई नई॥ द्विजदेव की सौं लाज बैरिन कुसंग इन, अंगन ही आपने, अनीति इतनी ठई॥ हाय इन कुंजन …

बाग बिलोकनि आई इतै

बाग बिलोकनि आई इतै, वह प्यारी कलिंदसुता के किनारे। सो द्विजदेव कहा कहिए, बिपरीत जो देखति मो दृग हारे॥ केतकी चंपक जाति जपा, जग भेद प्रसून के जेते निहारे। …

डारे कं मथनि, बिसारे कं घी कौ घडा

डारे कं मथनि, बिसारे कं घी कौ घडा, बिकल बगारे कं, माखन मठा मही। भ्रमि-भ्रमि आवति, चंधा तैं सु याही मग, प्रेम पय पूर के प्रबाहन मनौं बही॥ झुरसि …

जावक के भार पग धरा पै मंद

जावक के भार पग धरा पै मंद, गंध भार कचन परी हैं छूटि अलकैं। द्विजदेव तैसियै विचित्र बरूनी के भार, आधे-आदे दृगन परी हैं अध पलकैं॥ ऐसी छबि देखी …

चित चाह अबूझ कहै कितने छवि छीनी गयँदन की टटकी

चित चाह अबूझ कहै कितने छवि छीनी गयँदन की टटकी । कवि केते कहैं निज बुद्धि उदै यह लीनी मरालन की मटकी । द्विजदेवजू ऎसे कुतर्कन मे सबकी मति …

कै बिधि कँचनगार सिंगार कै दीने बनाय अनूपम रंग के

कै बिधि कँचनगार सिंगार कै दीने बनाय अनूपम रंग के । कै कदली उलटी ह्वै विराजत कै करि शुँड दिखात उमँग के । ऐसी लसैँ उपमा तिनकी द्विज भाषत …

आवती चली है यह, विषम बयारि देखि

आवती चली है यह, विषम बयारि देखि, दबे-दबे पांइन, किवारिन लरजि दै। क्वैलिया कलंकिनि को दै री समुझाई, मधुमाती मधुपालिनी, कुचालिनि तरजि दै॥ आज ब्रज रानी के बियोग कौ …

आज सुभाइन ही गई बाग

आज सुभाइन ही गई बाग, बिलोकि प्रसून की पांति रही पगि। ताही समै तहं आए गुपाल, तिन्हें लखि औरो गयो हियरो ठगि॥ पै ‘द्विजदेव’ न जानि परयो धौं कहा …