Category: सी. एम. शर्मा

छन्न पकैया….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

छन्न पकैया छन्न पकैया, बसंत राजा आये… बगिया में फूल खिले हैं, भँवरे भी मंडराएं… छन्न पकैया छन्न पकैया,अपनी दिल की बोली.. नासमझा कूंएं में जा, जो समझा हमजोली… …

दिल के कोने से…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरे ज़हन-ओ-दिल में छुपे रहते हो…. न जाने क्या क्या करते रहते हो…. रात को नींद नहीं आती…. दिन में भटकाते रहते हो….. हसीं मेरी अफ़साना बन गयी…… मुस्कुराके …

मुर्दे की पहचान…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

ज़िंदा रहा होगा इंसान कभी… जिसकी लाश काँधे पे उठा शमशान जा रहे थे सभी… घर वाले…रिश्तेदार…दोस्त…साथ थे सभी…. उनमें से किसी के साथ… मरने वाले का बचपन से …

अभिनय…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

बचपन में परियों की कहानी सुनते थे… जब भी बच्चे को सुलाते थे… बोलते थे की सो जा …. सपने में परी देश से परी आएगी… सुन्दर सुन्दर खिलोने …

‘वंदे मातरम’ ….सी. एम्.शर्मा (बब्बू)….

हो हरियाली,शान्ति,खुशहाली का संगम हर ओर… हर मन नाचे, झूमें, गाये हो भाव विभोर.. जन,गन,मन की लय पे बच्चा,बूढा और किशोर.. वंदे मातरम से ध्वनित हो नभ,जल, भू का …

तुम आना ज़रूर…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तुम लौट कर नहीं आये…. सांसें आ जा रही थी… प्राण नहीं आये…. तुम लौट कर नहीं आये….. शरीर निर्जीव हो गया है मेरा… प्राण हैं की इंतज़ार में…. …

भारत माँ की शान हो तुम…सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ….

बेटी आँगन का फूल हो तुम… जीवन स्वर में संगीत हो तुम… मेरी आँखों में ज्योति हो तुम… साँसों में प्राण मेरे हो तुम… तुम से घर में उजियारा …

न भूले तुम न भूला मैं….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मोहब्बत में मेरे दिल को ये कैसी बेतबारी है… सुकूत-ऐ-मर्ग तारी है, सबसे राज़दारी है… (खामोशी मौत सी छाई है, सबसे राज़दारी है) ये नीला आसमान खूँ रंग हो …

तस्वीर….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तस्वीर बनायी है इक मैंने… कुछ आढी तिरछी रेखाओं से… उलझी सी ज़ुल्फें उसकी… सुलझाने की कोशिश में.. हाथ बढ़ाया मैंने… की रंग से भरने लगे…. तकदीर में उसकी… …

भोर का आगमन…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

भोर होने को वक़्त था अभी…. हलचल बाहर की ने मुझे समय से पहले जगा दिया… ठिठुरती सर्दी में बाहर पड़ोस में… कुछ लोग खड़े बातें कर रहे थे… …

निशाँ ढूंढते हैं…..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

लोग मेरी ज़िन्दगी का निगेहबाँ ढूंढते हैं… अफसानों में मेरे इश्क़ का जहॉं ढूंढते हैं… दो पहर रात बाकी है सूली को अभी से…. गिरह लगाने को गर्दन पे …

जिन्ह प्रेम कियो तिन्ह ही प्रभ पायो….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

मैं पागल हो भया पढ़ पढ़ सारी रात…. फिर उसपे लिखता रहा ज्यूं हुई प्रभात… पढ़-पढ़ लिख-लिख के ज्ञान भयो बहुतेरो… व्यर्थ भयो सब ही जो ना समझा प्रेम …

चमके भारत संग भाग्य हमारा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

नभ में जब तक चाँद सितारे…. रहे आँगन ख़ुशी अपार तुम्हारे…. नित नूतन दिन सुनहरा हो तुम्हारा… मन आँगन रहे हर पल उजियारा…. हर पल प्यार की खुशबू महके…. …

हाल-ए-दिल अपना…सी.एम् शर्मा (बब्बू)….

हाल-ए-दिल हमसे अपना, सुनाया न गया…. दर्द सोया था जो मुश्किल से, जगाया न गया… हर वफ़ा जुर्म हो दुनिया में मुमकिन है कहाँ…. दिल से हर वक़्त तुझे …

अंजाम-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)……

दर्दे इश्क़ में यूं मेरे, जज़्बात हो पड़े…. बेख्याल बेवजह, दिल है की रो पड़े…. हर्फो हया से दोस्ती, महंगी पड़ी हमें… जज़्बा-ऐ-इश्क़ खुद के, हम कैद हो पड़े… …

इस “मैं” को समझाऊँ क्या….सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ….

तुझ बिन रात और दिन है क्या… तुझ को मैं समझाऊँ क्या… स्याह रात दिल की तन्हाई… अपने को समझाऊँ क्या…. दर्द है मेरा जिगर भी मेरा… तुम को …

तमाशा…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

तालियों की गड़गड़ाहट हो रही थी… सब खड़े हो के ताली बजा रहे थे… जैसे दुनिया में तमाशा… चपल उँगलियों में नाचती… कठपुतलियों का पहली बार देखा हो… कितने …

हम तो सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

जान तुम पर निसार करते हैं… हम तो सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं….. कौन होगा जहाँ में तुम सा हसीं…. हो अगर हम ना ऐतबार करते हैं…. अपनापन लगता …

प्रीत की रीत निराली है….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

प्रीत की रीत निराली है…. हर दिन दिल में दिवाली है….. प्रीत की रीत निराली है…. रात अँधेरी सुनहरी लगती.. तपती धूप मतवाली है….. प्रीत की रीत निराली है…. …

आशा-4…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

स्वभाविक सा…सहज सा है… आशा विश्वास का मेल…. बच्चा माँ बाप का हाथ पकड़ चलता है… गाड़ियों की भीड़ में से…डर नहीं उसे… विश्वास के रूप में माँ और …