Category: सी. एम. शर्मा

आओ सब दीपावली मनाएं…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जगमग जगमग धरा हो अपनी… आसमां ख़ुशी से झिलमिलाये… मन से मन का दीप जला के… आओ सब दीपावली मनाएं… मेरा हाथ तेरे काँधे पे हो… तू ज्योति मेरे …

प्यार तो बस महकता महकाता है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

प्यार  का  अंदाज़  मैंने  तुम  से है सीखा…. नज़रें  चुराना भी  तो  तुम्हीं  से है सीखा… इज़हारे  जज़्बात  ब्यान कैसे करूं तेरा… सिले होंठों से आँखों में मुस्काना सीखा…. …

बंद मुठ्ठी की बस ज़मी सी है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

रोज़ मरने की……..जुस्तजू की है…. आपसे मिलके ही….ज़िन्दगी जी है… हर किसी सी………..चाह है न मेरी… बंद मुठ्ठी की बस………..ज़मी सी है… वो मिला दिन चार का…… साथ रहा… …

तुझको मिटाया न गया…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

दिल मेरा तुझ बिन किसी हाल बहलाया न गया… भीड़  में  हो  के भी तनहा  मन छुपाया न गया… चाँद  चेहरे  पे  सितारों  से  चमकते  ये  नयना… लाख कोशिश …

एतबार…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

अश्क आँखों से बहाकर कोई इकरार करे… संग दिल दुनिया में कैसे कोई इज़हार करे…. ले मुझे डूबा मेरा दोस्त………मांझी वो मेरा… कैसे अपनों पे भी क्यूँ अब कोई …

मैं बदली हूँ, बस नीर भरी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मैं बदली हूँ, बस नीर भरी… बिन बरसे, बरसूं हर घडी… मैं बदली हूँ बस नीर भरी… सावन आये लाये बौछार.. शोलों सा वो करें प्रहार… मन मेरा करे …

शायद….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

सपनों से निकल हकीकत तुम बन जाओ…. चाँदनी बन मुझमें तुम कभी सिमट जाओ… रात रौशन हो जायेगी मेरी तुमसे ए सनम… आँचल से मुझपे तारों को छिटका जाओ… …

“चौका”- भ्रमजाल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II जापानी विधा “चौका” II मन का भ्रम संबंधों में दरार दंब प्रहार छिन्न भिन्न संसार फैसला हुआ अपने पराये का तेरा ओ मेरा खून भी बंट गया अंध …

तरुवर छाया कहीं मिल जाती है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मंद मंद चलती समीर, यूं तेरे बालों को लहराती है…. जैसे मस्त बदली कोई, चाँद को चूम चूम जाती है… सुप्त इश्क़ का अंकुर, उर में हलचल करता है… …

चलो मेरे संग…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

स्पर्श आईना है अंतर्मन का प्यार, घृणा का अपने होने न होने का ज़िन्दगी में जीवन बाकी है मौत अभी जीती नहीं है हमसे आह्वान है संभलने संभालने का …

मैं जग मचाया शोर…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – गीतिका  II अपनी अपनी सब कहते, अपनी ना पहचाने…. अपने को जब खो बैठे, आयी अक्ल ठिकाने… चोरों का सरदार बना, लिए धर्म का ठेका… कोवा …

सलाह…..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

कैसे हैं आप…. अच्छा हूँ…आप कैसे…. बढ़िया हूँ…बस सीने में दर्द उठता है कभी कभी…. अच्छा…डॉक्टर को दिखाना था… डॉक्टर क्या करेगा… नहीं चेक करवा लो…कई बार अटैक हो …

हुई सहर जो …सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

धुआं सा दिल पे मेरे, पसर गया यारो…. तलाश अपनी में मैं, निकल पड़ा यारो…. वो आशियाँ जो सजाया था, दिल के सपनों ने… कहीं मंदिर कहीं मस्जिद में, …

सुकून है मुझे…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II रुबाई II सलामत है तू, ये ख़ुदा का फज़ल है…. चरागे मोहब्बत से, जला मेरा चमन है…. निशानी मोहब्बत मेरी, है खंजर पे तेरे… सुकून है मुझे, तेरा …

नज़्म – तुम ही बोलो ….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

आज फिर तुमने, दिल मेरे पे, दस्तक दी है…. मेरे बालों में, तेरी उँगलियों ने, हरकत की है… एक सिहरन सी, बदन मेरे में, लहराई है…… ठहरे पानी में …

सब उसके हैं खेल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

II छंद – सरसी  II चितचोर माखनचोर है वो, गिरिधर ही गोपाल I रणछोड़ कहो गोकुल ग्वाला,कह डारो नँदलाल II नाम पुकारो कुछ भी उसका,सब उसके हैं खेल I …

सब हुए एक ही रंग..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

II सरसी/हरिपद छंद II नंदलाल की मुरली बाजी, चढ़ा प्रेम का रंग I सुधबुध सबकी ऐसी बिसरी,भूल गये सब ढंग II कोई नाचे कोई गाये, सब हुए एक ही …

त्रिवेणी – आजाद – प्रबुद्ध भारत – सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

(१) ध्वजारोहण… आन, बान, शान हर भारतीय का… राष्ट्रीय एकता. (२) वन्देमातरम… भारत की रूह की आवाज़.. ज़िन्दगी को सलाम. (३) शहीदों के बलिदान से… आजाद हुआ भारत.. मानसिकता …

चलो आज प्रण हम दुबारा करें…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

चलो आज प्रण हम दुबारा करें… पड़े भीड़ जब भी देश अपने पे… हर क़तरा खून का उसपे वारा करें…. चलो आज प्रण हम दुबारा करें… हर तरफ हो …

चिराग बुझने न दें….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

जलाएं है चिराग घर हमारे, शहीदों ने अपना लहू देके… जात, पात और धर्म की आग से आओ इसे बुझने न दें… \ /सी.एम्. शर्मा (बब्बू) (साइट की प्रॉब्लम …