Category: सी. एम. शर्मा

माँ का आँचल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

सुनहरी शाम के मंज़र बड़े प्यारे थे… फलक पे चमक रहे सितारे थे… उछाला हवा में माँ ने बच्चे को ज्यूं ही… माँ के आँचल में बच्चे संग सभी …

मात-प्रेम…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चौपाईII दाम पड़ती छोटी जाए, कृष्णा उदर बंध ना पाए… माँ लल्ला का बंधन चाहे, योगी भी पकड़ना चाहे… माया धारी में जो उलझे,योग ज्ञान तप से ना सुलझे… …

माँ महिमा….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चोपाई II मैया चाँद दिला दो मुझको,गर लगता मैं प्यारा तुझको… नहीं मिला जो चाँद खिलौना,गुस्सा मैं फिर तुमसे होना… मत अपना तुम लल्ला कहना,नन्द लाल मैं बन के …

रहमत खुदा की..सी. एम्. शर्मा (बब्बू) ..

गर रोने का नाम प्यार होता तो हम भी रो लेते…. करके नुमाईश ज़ख्मों की वाहवाही ले लेते… नादान रहे समझे नहीं मोहब्बत व्योपार भी होता है… एक हाथ …

ममता बंधन….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

IIछंद-चोपाईII नटखट कान्हा भागें आगे, मात यशोदा पीछे पीछे… पकड़ लिए कान्हा जब माँ ने, बाँध दियो ओखली संग में…. जिसको देखे टूटें बंधन, बंधे वो ममता के बंधन… …

“माँ” को समर्पित…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

IIछंद – चौपाईII ऊषा किरणें चरण पखारें, पुरवाई चंवर झुलायें… नाटक करते नटखट कान्हा, मूंदें आँखें ज्यूं सोने का… बलिहारी लीला पे उसकी, श्याम सलोनी सूरत जिसकी …. डांटे …

फासले दिल के…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जुस्तजू में ही, बिखर गए, सपने मेरे… चर्चे भी हर तरफ, उम्मीद से, निकले मेरे…. वक़्त गुज़रा है, कुछ इस-तरहा, मेरा… अपने ही रूप में, दुश्मन नज़र, आये मेरे…. …

गधों का मता…..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

यह राजनीति भी कैसी राजनीति है…. बिना सर पैर सरपट भागती है…. मुद्दे सब पीछे छूट जाते हैं… जनता भौचक्की ताकती रह जाती है…. इलेक्शन आते ही नेताओं के …

मन मेरा इत उत भागे रे….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मन मेरा इत उत भागे रे…. उड़ जाए बदली बन कभी… कभी चाँद सा झांके रे…. जंगल में सबने क़ानून बनाया… दुश्मन भी जिसने दोस्त बनाया… बिल्ली मौसी के …

छन्न पकैया….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

छन्न पकैया छन्न पकैया, बसंत राजा आये… बगिया में फूल खिले हैं, भँवरे भी मंडराएं… छन्न पकैया छन्न पकैया,अपनी दिल की बोली.. नासमझा कूंएं में जा, जो समझा हमजोली… …

दिल के कोने से…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरे ज़हन-ओ-दिल में छुपे रहते हो…. न जाने क्या क्या करते रहते हो…. रात को नींद नहीं आती…. दिन में भटकाते रहते हो….. हसीं मेरी अफ़साना बन गयी…… मुस्कुराके …

मुर्दे की पहचान…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

ज़िंदा रहा होगा इंसान कभी… जिसकी लाश काँधे पे उठा शमशान जा रहे थे सभी… घर वाले…रिश्तेदार…दोस्त…साथ थे सभी…. उनमें से किसी के साथ… मरने वाले का बचपन से …

अभिनय…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

बचपन में परियों की कहानी सुनते थे… जब भी बच्चे को सुलाते थे… बोलते थे की सो जा …. सपने में परी देश से परी आएगी… सुन्दर सुन्दर खिलोने …

‘वंदे मातरम’ ….सी. एम्.शर्मा (बब्बू)….

हो हरियाली,शान्ति,खुशहाली का संगम हर ओर… हर मन नाचे, झूमें, गाये हो भाव विभोर.. जन,गन,मन की लय पे बच्चा,बूढा और किशोर.. वंदे मातरम से ध्वनित हो नभ,जल, भू का …

तुम आना ज़रूर…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तुम लौट कर नहीं आये…. सांसें आ जा रही थी… प्राण नहीं आये…. तुम लौट कर नहीं आये….. शरीर निर्जीव हो गया है मेरा… प्राण हैं की इंतज़ार में…. …

भारत माँ की शान हो तुम…सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ….

बेटी आँगन का फूल हो तुम… जीवन स्वर में संगीत हो तुम… मेरी आँखों में ज्योति हो तुम… साँसों में प्राण मेरे हो तुम… तुम से घर में उजियारा …

न भूले तुम न भूला मैं….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मोहब्बत में मेरे दिल को ये कैसी बेतबारी है… सुकूत-ऐ-मर्ग तारी है, सबसे राज़दारी है… (खामोशी मौत सी छाई है, सबसे राज़दारी है) ये नीला आसमान खूँ रंग हो …

तस्वीर….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तस्वीर बनायी है इक मैंने… कुछ आढी तिरछी रेखाओं से… उलझी सी ज़ुल्फें उसकी… सुलझाने की कोशिश में.. हाथ बढ़ाया मैंने… की रंग से भरने लगे…. तकदीर में उसकी… …