Category: सी. एम. शर्मा

न भूले तुम न भूला मैं….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मोहब्बत में मेरे दिल को ये कैसी बेतबारी है… सुकूत-ऐ-मर्ग तारी है, सबसे राज़दारी है… (खामोशी मौत सी छाई है, सबसे राज़दारी है) ये नीला आसमान खूँ रंग हो …

तस्वीर….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तस्वीर बनायी है इक मैंने… कुछ आढी तिरछी रेखाओं से… उलझी सी ज़ुल्फें उसकी… सुलझाने की कोशिश में.. हाथ बढ़ाया मैंने… की रंग से भरने लगे…. तकदीर में उसकी… …

भोर का आगमन…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

भोर होने को वक़्त था अभी…. हलचल बाहर की ने मुझे समय से पहले जगा दिया… ठिठुरती सर्दी में बाहर पड़ोस में… कुछ लोग खड़े बातें कर रहे थे… …

निशाँ ढूंढते हैं…..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

लोग मेरी ज़िन्दगी का निगेहबाँ ढूंढते हैं… अफसानों में मेरे इश्क़ का जहॉं ढूंढते हैं… दो पहर रात बाकी है सूली को अभी से…. गिरह लगाने को गर्दन पे …

जिन्ह प्रेम कियो तिन्ह ही प्रभ पायो….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

मैं पागल हो भया पढ़ पढ़ सारी रात…. फिर उसपे लिखता रहा ज्यूं हुई प्रभात… पढ़-पढ़ लिख-लिख के ज्ञान भयो बहुतेरो… व्यर्थ भयो सब ही जो ना समझा प्रेम …

चमके भारत संग भाग्य हमारा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

नभ में जब तक चाँद सितारे…. रहे आँगन ख़ुशी अपार तुम्हारे…. नित नूतन दिन सुनहरा हो तुम्हारा… मन आँगन रहे हर पल उजियारा…. हर पल प्यार की खुशबू महके…. …

हाल-ए-दिल अपना…सी.एम् शर्मा (बब्बू)….

हाल-ए-दिल हमसे अपना, सुनाया न गया…. दर्द सोया था जो मुश्किल से, जगाया न गया… हर वफ़ा जुर्म हो दुनिया में मुमकिन है कहाँ…. दिल से हर वक़्त तुझे …

अंजाम-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)……

दर्दे इश्क़ में यूं मेरे, जज़्बात हो पड़े…. बेख्याल बेवजह, दिल है की रो पड़े…. हर्फो हया से दोस्ती, महंगी पड़ी हमें… जज़्बा-ऐ-इश्क़ खुद के, हम कैद हो पड़े… …

इस “मैं” को समझाऊँ क्या….सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ….

तुझ बिन रात और दिन है क्या… तुझ को मैं समझाऊँ क्या… स्याह रात दिल की तन्हाई… अपने को समझाऊँ क्या…. दर्द है मेरा जिगर भी मेरा… तुम को …

तमाशा…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

तालियों की गड़गड़ाहट हो रही थी… सब खड़े हो के ताली बजा रहे थे… जैसे दुनिया में तमाशा… चपल उँगलियों में नाचती… कठपुतलियों का पहली बार देखा हो… कितने …

हम तो सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

जान तुम पर निसार करते हैं… हम तो सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं….. कौन होगा जहाँ में तुम सा हसीं…. हो अगर हम ना ऐतबार करते हैं…. अपनापन लगता …

प्रीत की रीत निराली है….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

प्रीत की रीत निराली है…. हर दिन दिल में दिवाली है….. प्रीत की रीत निराली है…. रात अँधेरी सुनहरी लगती.. तपती धूप मतवाली है….. प्रीत की रीत निराली है…. …

आशा-4…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

स्वभाविक सा…सहज सा है… आशा विश्वास का मेल…. बच्चा माँ बाप का हाथ पकड़ चलता है… गाड़ियों की भीड़ में से…डर नहीं उसे… विश्वास के रूप में माँ और …

मर्म…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

एक दिन लडडू जलेबी की मुलाक़ात हो गयी…. लडडू ने जलेबी को देखा बड़े गौर से… शरारत में मुंह खोला..बोला ज़रा जोर से.. क्यूँ इतना इतराती हो अपने छरहरे बदन पे.. …

पागल…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

उसने पुछा तेरे तस्सवुर में कौन रहता है.. जो तू इतना खिला खिला सा रहता है…. मैंने उसको बोला क्या कहूँ तुमको वो कौन है…. एक रूप एक नाम हो …

मन….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

मन गोरी का महकता, कमर मटकत नाहीं…. राख गगरी सर उसने, कमर लियो मटकाए…. कमर लियो मटकाए, सब ससुरा पागल भयो… होश बिसरि देखि जो, घरवाली ने धर लियो…. …

आशा-2…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

आशा….. ज़िन्दगी में कितनी ज़रूरी है… प्राण हैं ये…. बिना इसके जीवन निरर्थक सा है… मृत्यूतुल्य…… जैसे कुछ है ही नहीं सब कुछ होते हुए भी…. बीमार शरीर तो …

आशा-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आशा….. हम में ही निहित है…जन्म से… प्रकिर्ति में निहित है हमारे चारों तरफ… यत पिण्डे तत ब्रह्मांडे… जो भीतर है वही तो बाहर है…. रोज़ ही फूल पौधे …

मौत…सृजन…सी. एम्. शर्मा (बब्बू) ….

मौत होती नहीं किसी की सृजन होता है…. ज़िन्दगी का जैसे एक नया जन्म होता है…. जब तक मिथ्या नहीं होता जो है अब… कैसे कहें फिर की परिवर्तन …

क्यूँ रंग बिखरा देख दिल सफाई देता है…सी. एम्. शर्मा(बब्बू)…

धुंआ धुंआ सा ये शहर दिखाई देता है….. हरेक शख्स ही जिस्म की दुहाई देता है…… हरेक बात में चर्चा था मेरे इश्क़ का यहाँ…. क्यूँ आज गुमसुम मौसम …